मूर्ति विवाद की जांच करने पहुंची विवि की टीम
केसीटीसी महाविद्यालय में मूर्ति लगाने को लेकर उत्पन्न हुए विवाद की जांच के लिए कुलानुशासक की अध्यक्षता में टीम रक्सौल पहुंची. इस दौरान भरी सभा में कुलानुशासक ने कहा कि इस महाविद्यालय में कुछ भी ठीक नहीं है.
रक्सौल : खेमचंद ताराचंद महाविद्यालय परिसर में फरवरी माह में बने सरस्वती मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा के बगल में स्थापित पूर्व प्राचार्य ज्वाला प्रसाद की प्रतिमा का स्थापना प्रथम दृष्टया सही नहीं है. कॉलेज की स्थापना से लेकर यहां तक पहुंचाने में पूर्व प्राचार्य की अहम भूमिका रही है. उनकी प्रतिमा बेहतर तरीके से बेहतर जगह पर लगाया जाना चाहिये, लेकिन कॉलेज प्रशासन द्वारा गलत स्थान का चयन किया गया.
ये बातें मूर्ति विवाद के बाद विश्वविद्यालय द्वारा गठित टीम के जांचोपरांत कुलानुशासक सतीश राय अंजाना ने कहीं. वे आगमन के साथ स्टॉफ रूम पहुंचे और प्राचार्य पर बरसना शुरू कर दिया. कहा कि आप बिना छुट्टी रक्सौल से दिल्ली चले गये. जबकि यह गलत है. आपने अपने बदले किसी को चार्ज नहीं दिया. विश्वविद्यालय को सूचित नहीं किया. सरस्वती मंदिर स्थापना से लेकर पूर्व प्राचार्य की मूर्ति स्थापना तक किसी से अनुमति नहीं ली.
इसके जवाब में प्राचार्य डॉ जयनारायण प्रसाद ने कहा कि मैं मूर्ति लगाने का अनुमति नहीं दिया था. इस पर कुलानुशासक ने कहा कि क्या आपने एफआइआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है. तो इसके जवाब में कहा नहीं. इसके अलावा स्टॉफ रूम की जर्जर स्थिति व महाविद्यालय की स्थिति को देखते हुए कुलानुशासक ने कहा कि नैक की जांच चल रही है. यदि इस महाविद्यालय में जांच हुई तो डी ग्रुप मिलेगा. इसके बाद इस कॉलेज को कोई फंड नहीं मिलेगा.
छोटे-छोटे महाविद्यालय तरक्की कर गये. आपने तो कुछ किया ही नहीं. यदि काम करना है तो करिये नहीं तो भेज दिया जायेगा बकुची. कुलानुशासक भरी सभा में बोलते रहे और प्राचार्य सुनते रहे. जांच टीम में कुलानुशासक के अलावे अंगरेजी के विभागाध्यक्ष देवव्रत अकेला, महाविद्यालय निरीक्षक विज्ञान सुनील कुमार सिंह, वाणिज्य के डीन डॉ रामचंद्र प्रसाद व विश्वविद्यालय निरीक्षक कला डॉ रजनीश गुप्ता एवं महाविद्यालय के सभी प्रोफेसर व कर्मी उपस्थित थे.
लगाये मूर्ति : कुलानुशासक ने कहा कि जमीनदाता परिवार के लोगों को महाविद्यालय में सम्मान मिलना चाहिये. अब तक उनकी मूर्ति क्यों नहीं लगी. पूर्व प्राचार्य की मूर्ति प्रस्ताव लाकर सरस्वती मंदिर से सही सलामत स्थिति में किसी बेहतर स्थान पर लगाया जाये. साथ ही जमीनदाता परिवार के लोग मूर्ति देते हैं तो उनकी भी मूर्ति लगायी जाये.
उनके नाम पर पुस्तकालय का नामांकरण कराया जाये. इसके बाद कॉलेज के संस्थापक स्व लाल परेखा मिश्र के पुत्र बच्चा मिश्र ने कहा कि कॉलेज के संस्थापक लाल परेखा मिश्र हैं. उन्होंने मालवीय की तरह किसी से जमीन, किसी से चंदा लेकर कॉलेज का स्थापना की है.
जमीन दाता परिवार के डीड में भी साफ-साफ लिखा है कि वे अपने लाल परेखा मिश्र को कॉलेज स्थापना के लिए जमीन दान दे रहे हैं. जिसपर पर कुलानुशासक ने कहा कि प्राचार्य एक टीम का गठन करें, जिसमें जमीनदाता व संस्थापक के पुत्र व संस्थापक प्राचार्य के पुत्र से आवेदन लेकर तीनों से मूर्ती लेकर महाविद्यालय परिसर में मूर्ति का स्थापना करें.
किया विरोध : जमीनदाता परिवार के चिरजी लाल मस्करा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हमारे डीड में यह लिखा है कि सिर्फ उनके पिता की मूर्ति लगेगी. अन्यथा की स्थिति में हमारा जमीन वापस कर दिया जायेगा. इसके लिए हमने न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराया है और डिग्री भी मिली है. इसे सुनते ही महाविद्यालय के सभी प्रोफेसर यह कहने लगे कि ऐसा कहीं नहीं लिखा है और यदि वे मुकदमा किये हैं तो जजमेंट आने के बाद ही कुछ होगा.
जिसके बाद कुलानुशासक ने कहा कि हम विवाद को संवाद में बदलने आये हैं. दाता परिवार चिरजी लाल मस्करा को रहीम की एक कविता सुनाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति किसी को दान देता है तो नीचे देखता है. आप जमीन दिये है तो आपको इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिये. आपके पिता की मूर्ति लगे, यह सही है, लेकिन किसी और की नहीं लगे यह गलत है.
कुछ भी नहीं मिला ठीक: स्टॉफ रूम की घड़ी बंद थी. उन्होंने कहा कि सरकार सब जगह बॉयोमैट्रिक लगाने में जुटी है और आपके यहां घड़ी ही बंद है. आखिर आपके स्टॉफ क्लास कैसे लेते होंगे. इसके जवाब में उपस्थित लोगों ने कहा कि इस महाविद्यालय में कभी क्लास नहीं होता है. फर्जी रूप से उपस्थिति दर्ज की जाती है. इसके बाद कुलानुशासक ने पंजी मंगाकर जांच करना शुरू किया तो कई लोगों की उपस्थिति दर्ज नहीं थी. पूछने पर एक कर्मी ने कहा कि अभी उपस्थिति नहीं बनाये हैं, काम में लग गये थे. बाद में बना लेंगे. जिसपर कुलानुशासक ने कहा कि आते समय नहीं जाते समय बनेगी उपस्थिति.
आपका समय पूरा हो गया है : कुलानुशासक ने कहा कि आपका समय पूरा हो गया है. आप अपनी पत्नी की बीमारी का आवेदन देकर यहां जमे हुए हैं. आपने विश्वविद्यालय को आवेदन दिया है कि आपकी पत्नी बीमार है और रक्सौल के डंकन अस्पताल से उनका इलाज चल रहा है. इसी आधार पर आप यहां जमे हुए हैं. किसी व्यक्ति को अपने शहर में काम करने का मौका मिलता है तो वह खूब काम करता है, लेकिन आप तो यहां कुछ किये ही नहीं हैं. इस महाविद्यालय को डूबा दिया है. नैक के ग्रेडिंग में क्या स्थान मिलेगा. यह देखने से लग चुका है. भविष्य के लिए ग्रेडिंग के बाद सारा फंड बंद हो जायेगा.
