मोतिहारी : रमजानुल मुबारक मुसलमानों का पाक व पवित्र महीना होता है़ यूं कहे तो यह हमदर्दी व गमरूवाही का महीना है़ रमजान का संबंध पाक पवित्र धर्मग्रंथ कुरान से ताल्लुक है़
रमजान के पूरे महीने में कुरान जैसी मुकद्दस किताब अवतरित हुई़ इसमें इनसान के जीवन से जुड़ी हुई तमाम समस्याओं के समाधान मौजूद है़ं कुरान जिस नबी पर नाजिल हुआ, तमाम नबियों के इमाम हजरत आमल को देखकर फ रिश्ते भी खुश होते है़
जिस पाक जमीन पर कुरान नाजिल हुआ व पवित्र सरजमी मक्का-मदीना कहलाया और जिस रात इसका नजूल हुआ व रात लैलतुल कदू अर्थात हजारों महीना से बेहतर यह रात है़, जिसे सबेकदू की रात कहते है़
इस महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है़ पहला दस दिन मगफेरत ताकि इनसान अल्लाह ताला से अपने गलतियों का तौबा और मगफेरत करें़ फि र दस दिन रहमत का महीना होता है़ फि र दस दिन आग से खुलासी यानि जहन्नुम के आग से बरी होता है़
गोया के अल्लाह ताला एक नमाज के बदले 70 नमाजों का शवाब देता है़ इस महीने में झूठ, गिबत, चुगली पूरे अम्ल से परहेज करना तब जाकर रोजे का अम्ल होता है़ अगर इस चीजों से इनसान परहेज नहीं करेगा तो सुबह शादिक से गुरूबे आफ ताब तक भूखा रहने से उसको कोई फायदा नहीं पहुंचेगा़ इस महीने में इफ्तार के वक्त जो इनसान दुआ करता है, अल्लाहताला इसको कुबूल करते है़
रमजानुल मुबारक के महीने मे मोमिन का रिजूक बढ़ा दिया जाता है़ रोजा मनुष्य को हर बुरे कार्य से रूक जाने का संदेश देता है, जो व्यक्ति हलाल व पवित्र माल से किसी रोजेदार को इफ्तार करवायेगा तो अल्लाहताला उसके अगले-पिछले गुनाहों को माफ करेगा और उस पर जहन्नुम की आग हराम होगी. इस महीने में जो व्यक्ति नेकी, भलाई, सहानुभूति करेगा उसे बहुत शवाब होता है़ यही महीना परहेजगारी व सहनशक्ति और आपसी मेल-जोल व सदभाव को बढ़ाने का पवित्र महीना है़
