40 साल में नहीं बन सका विकास भवन

लोगों ने जमाया अवैध कब्जा सामने आ रही प्रशासनिक लापरवाही झंझारपुर : अनुमंडल मुख्यालय के समीप चार दशक पहले निमार्णाधीन विकास भवन को आज तक पूरा नहीं किया जा सका है. ये प्रशासन की लापरवाही के नमूना पेश करता दिखाई पड़ रहा है. विकास भवन को पूर्ण करबाने की जहमत आज तक किसी प्रशासनिक अधिकारी […]

लोगों ने जमाया अवैध कब्जा
सामने आ रही प्रशासनिक लापरवाही
झंझारपुर : अनुमंडल मुख्यालय के समीप चार दशक पहले निमार्णाधीन विकास भवन को आज तक पूरा नहीं किया जा सका है. ये प्रशासन की लापरवाही के नमूना पेश करता दिखाई पड़ रहा है. विकास भवन को पूर्ण करबाने की जहमत आज तक किसी प्रशासनिक अधिकारी नहीं दिखा पाये है. इस कारण आधा अधूरा विकास भवन में लोगों ने अवैध कब्जा कर आराम से रहना शुरू कर दिया है.
क्या है मामला
लगभग 1975 ई में जिला प्रशासन की ओर से विकास भवन कह कर आठ कमरों का विशाल भवन का निर्माण शुरू करवाया गया. इतने दिन हो जाने के कारण सही जानकारी मिलनी कठिन हो रही थी. पर अनुमान के मुताबिक अनुमंडल के स्थापना के समय ही इस भवन की स्वीकृत मिली थी. इसके आलोक में संवेदक ने आठ कमरों का भवन निर्माण करानी शुरू की.
इसी बीच स्थानीय कुछ लोगों के साथ विवाद हो गया. इसको लेकर मारपीट भी हो गयी थी. उसके बाद संवेदक काम को आधा अधूरा छोड़कर चला गया. जो आज तक वैसा ही पड़ा हुआ है. गौरतलब हो कि झंझारपुर नगर पंचायत कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय, डीएसपी कार्यालय सहित अनुमंडल के अन्य कार्यालय के बगल में 1975 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद विकास भवन आज तक पूर्ण होने की आस में बैठा हुआ है.
आधा अधूरा विकास भवन लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है. अभी लोग आस में बैठे हैं कि ये विकास भवन को पूर्ण किया जाएगा, या इसको नये सिरे से भवन बनाकर किसी विकासात्मक कार्यों के लिए लोगों को मुहैया कराया जायेगा. विकास भवन इस विकास भवन को पूर्ण को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को अवगत कराया. पर आज तक उसको पूर्ण करने के लिए किसी भी अधिकारी ने जहमत नहीं उठायी. इस बीच कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा कर अपना अशियाना बनाकर रह हैं. इसके अलावे कोर्ट के टंकण करने के लिए भी लोग कब्जा किये हुए है.
पूर्ण नहीं होने के बाद भी लोगों द्वारा कब्जा कर रहने को लेकर लोगों में उतना आक्रोश नहीं हैं. पर आज भवन की स्थिति जर्जर हो जाने के कारण लोग प्रशासन को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं. इस भवन के बारे में नगर पंचायत से जानकारी लेनी चाही तो कर्मियों ने बताया कि ये भवन मधुबनी जिला प्रशासन की ओर से विकास भवन के रूप में बनानी शुरू की थी. संवेदक और कुछ लोगों के विवाद के कारण आधा अधुरा काम छोड़कर दिया गया, जो आज तक पूर्ण नहीं हो सका.
नगर पंचायत निवासी मानीक सिंह, पूर्ण प्रमुख मनीष राय, राजेंद्र मिश्र, सियाराम चौधरी, डॉ सुनील कुमार झा आदि ने बताया कि इस सरकार में विकास का ढोल खूब पीटा जाता है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है. आधा अधूरा भवन बने हुए की जानकारी प्रशासन को होने के बावजूद उसके ऊपर ध्यान नहीं देना प्रशासन की लापरवाही को बताता है. अगर समय पर अनुमंडल व नगर पंचायत प्रशासन चेता नहीं तो प्रशासन के खिलाफ आंदोलन भी किया जा सकता है.
क्या कहते अधिकारी
अनुमंडल पदाधिकारी जगदीश कुमार ने बताया कि इसकी जानकारी मीडिया से ही मिली है. वरीय पदाधिकारी से राय ली जायेगी.

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