हर साल घट रही 40 हजार क्विंटल अनाज की पैदावार

मोतिहारी : जिले में केंद्रीय व राज्यस्तरीय योजनाओं के कार्यान्वयन को ले करीब 2123 एकड़ (840 हेक्टेयर) खेती योग्य भूमि का रूप परिवर्तन हुआ है़ कुछ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में हैं. इस मद में किसानों को अब तक 1367 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है तो कुछ की भुगतान प्रक्रिया में है़ इस […]

मोतिहारी : जिले में केंद्रीय व राज्यस्तरीय योजनाओं के कार्यान्वयन को ले करीब 2123 एकड़ (840 हेक्टेयर) खेती योग्य भूमि का रूप परिवर्तन हुआ है़ कुछ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में हैं. इस मद में किसानों को अब तक 1367 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है तो कुछ की भुगतान प्रक्रिया में है़
इस प्रक्रिया से खाद्यान्न उत्पादकता पर असर पड़ा है़ प्रतिवर्ष 40 हजार क्विंटल खाद्यान्न की उत्पादकता घटी है़ बावजूद इसके उत्पादकता की भरपाई के लिए सरकारी स्तर पर कोई सार्थक पहल नहीं दिखायी देती है़ हां, इस निर्माण प्रक्रिया से नगर परिषद, नगर पंचायत, टेलिफ ोन, बिजली, खनन आदि विभागों के राजस्व में वृद्धि जरूर हुई है़ यहां बता दें कि पूर्वी चंपारण का भौगोलिक क्षेत्रफ ल नौ लाख 85 हजार 733.30 एकड़ और कृषि योग्य भूमि 665634.32 एकड़ है़ कृषि योग्य भूमि में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत का हृास हो रहा है़
प्रक्रिया में है भूमि अधिग्रहण
योजनाओं में बड़ी योजना यथा आइसीपी के लिए 115 करोड़, एनएच 28ए के लिए 300 करोड़, एनएच 104 के लिए 25 करोड़, पुल भूमि के लिए 59 करोड़, केविवि के लिए 300 और सुगौली-हाजीपुर रेललाइन भूमि के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत है़ जिला भू-अजर्न अधिकारी कुमार मंगलम ने बताया कि जहां भुगतान लंबित है, वहां प्रक्रिया पूरी कर भुगतान की जायेगी़ केविवि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में है़
कृषि योग्य भूमि में परिवर्तन
संयुक्त कृषि निदेशक सुनील कुमार पंकज ने बताया कि पूर्वी चंपारण में 665634.32 एकड़ भूमि कृषि योग्य है़ आबादी बढ़ने के साथ आवास के लिए और योजना कार्यान्वयन मद में औसतन पांच प्रतिशत भूमि का स्वरूप परिवर्तन हो रहा है़
जो भूमि अधिग्रहण किया गया है 2123 एकड़ उससे औसतन 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर यानि 40 हजार क्विंटल खाद्यान्न की उत्पादकता घटी है़ आवास निर्माण के कारण भी उत्पादकता प्रतिवर्ष घट रही है़
होना चाहिए वैकल्पिक उपाय
जमीन अधिग्रहण व स्वरूप परिवर्तन की स्थिति में आधुनिक तरीके से खेती करना ही विकल्प है़ किसान श्री ललन शुक्ला, हरिदयाल कुशवाहा, नवल सिंह ने कहा है कि कृषि योग्य जो जमीन बची है, उसमें उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर किसानों को सहयोग मिलने चाहिए, ताकि योजना कार्यान्वयन व आवास निर्माण से घट रही कृषि योग्य भूमि व उत्पादकता की भरपाई की जा सके.

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