भूकंप: बैंकों के लेन-देन पर असर

रक्सौल : विगत 25 अप्रैल से लेकर 12 मई तक कई बार आये भूकंप के झटकों के बाद लोगों के दिल में पैदा हुए दहशत का असर बैंकों पर भी देखने को मिल रहा है. रक्सौल में काम कर रही अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखा में व्यापार में 25 अप्रैल के बाद से काफी कमी […]

रक्सौल : विगत 25 अप्रैल से लेकर 12 मई तक कई बार आये भूकंप के झटकों के बाद लोगों के दिल में पैदा हुए दहशत का असर बैंकों पर भी देखने को मिल रहा है. रक्सौल में काम कर रही अधिकांश राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखा में व्यापार में 25 अप्रैल के बाद से काफी कमी दर्ज की गयी है. भूकंप के बाद औसतन 45 से 50 प्रतिशत कम लोग बैंक में आ रहे हैं.
इसके साथ कुछ बैंक जो नेपाली लोगों का खाता खोलते हैं, उन बैंकों में भी नेपाली नागरिकों की संख्या में कमी दर्ज की गयी है.मंगलवार को जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि भूकंप के बाद सभी प्रमुख बैंकों में पैसा भी कम आ रहा है और लोग भी कम आ रहे हैं.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मुख्य शाखा प्रबंधक अतीश कुमार गोड ने बताया कि 25 अप्रैल से पूर्व बैंक का प्रतिदिन का लेन-देन लगभग एक करोड़ से ज्यादा होता था, कभी-कभी 1.5 करोड़ के आस-पास. लेकिन 25 अप्रैल के बाद से यह आकड़ा 50 से 60 लाख तक ही जा पा रहा है.
वहीं आइसीआइसीआइ के शाखा प्रबंधक नीतिराज वर्मा ने बताया कि भूकंप के बाद से बैंक के बिजनेस पर 40 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ा है. 25 अप्रैल से पूर्व 250 के लगभग लोग बैंक में आते थे, जो भी 150 से 175 तक चल रहा है. इसी प्रकार यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक सुमित सौरभ ने बताया कि 25 अप्रैल से पूर्व 100 से 125 तक ग्राहक रोजना बैंक विजिट करते थे, लेकिन भूकंप के बाद अभी तक का औसत 70 से 75 रह गया है. बैंक ऑफ इंडिया के प्रभारी शाखा प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि भूकंप के बाद 30 प्रतिशत तक ग्राहकों की संख्या में कमी आयी है.
वहीं इंडियन ओवरसीज बैंक के शाखा प्रबंधक एस के झा ने बताया कि भूकंप से पहले लगभग 200 ग्राहक आते थे. अभी 100 से 125 आ रहे हैं. इसमें सबसे खास बात यह है कि पहले 200 में नेपाली कस्टमर की संख्या 70 से 75 होती थी, जो कि अभी घट कर 20 से 30 हो गयी है. ऐसे में साफ है कि भूकंप के बाद से बैंकों के लेन-देन पर इसका खासा असर पड़ा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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