मोतिहारी : किसानों की जीवनी शक्ति ही भूमि है़ किसान स्वाभिमानी होते है़ भूमि नहीं रहने पर आत्महत्या कर लेंगे, लेकिन भीख नहीं मांगेंग़े अगर किसानों के लिए वैकल्पिक आय की व्यवस्था सरकार करें तो किसान स्वेच्छा से भूमि अधिग्रहण अधिनियम को स्वीकार कर सकते हैं. ये बातें संवददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरीय अधिवक्ता हरेंद्र किशोर सिंह ने अपने चांदमारी स्थित आवास पर कही़
47 सालों से सिविल मामलों के वरीय अधिवक्ता श्री सिंह ने केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव दिया है़ कहा कि वर्तमान संदर्भ में देश के आर्थिक विकास के लिए भूमि का जबरन कब्जा नहीं किया जाना चाहिए़ इसलिए किसानों को वैकल्पिक आर्थिक श्रोत का प्रावधान अधिग्रहण अधिनियम में पर्याप्त मात्र में की जाये तो किसान स्वेच्छा से भूमि अधिग्रहण को राजी हो सकते है़.
कहा कि यदि केंद्र व राज्य सरकार जमीन का मुआवजा कैश क्रेडिट किसान के नाम से बैंक में कराय़े साथ ही पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित एजेंसी एक या एक से अधिक किसानों को एक साथ देने का प्रावधान करे, तो किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी़ श्री सिंह ने कहा कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम जैसे राशन डिलरशीप, ब्लॉक स्तर पर गैस एजेंसी अथवा डीजल पंप तथा इसी प्रकार के रोजगार की व्यवस्था की जाये तो किसान स्वयं आवेदन देकर अपनी भूमि का अधिग्रहण करायेंग़े
