रक्सौल : जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई युक्ति को चरितार्थ करते हुए आदापुर प्रखंड के उच्चिडीह निवासी सुनील कुमार ने शनिवार को काठमांडू में आये भूकंप के खुद की जान को जोखिम में डालने के बाद भी बच गये.
शुक्रवार को रक्सौल बिहार सरकार के राहत कैंप में पहुंचे सुनील ने बताया कि वह पिछले 14 साल से काठमांडू में वेल्डिंग करने का काम करता था.
जिस वक्त भूकंप आया, उस समय दर्जनों सहयोगी के साथ त्रिसूली की तीन मंजिला बिल्डिंग के सबसे ऊ पर हमलोग काम कर रहे थे. इसी बीच जब भूकंप का झटका आया तो हमने चिल्ला कर अपने साथियों को भागने के लिए कहा. इसी दौरान सभी सहयोगी तो नीचे उतर गये, लेकिन मैं ऊपर फंसा रह गया है और इसी बीच बिल्डिंग गिरने लगी. जिसके बाद मैंने फैसला किया कि बिल्डिंग में दब कर मरने से अच्छा है, कूद कर जान देना.
जिसके बाद मैंने छलांग दी और भगवान की कृपा से सकुशल कुद तो गया, लेकिन इसके कारण मेरा दाहिने पैर की हड्डी टूट गयी. काठमांडू में प्राथमिक उपचार हुआ. इसके बाद सहयोगियों की मदद से रक्सौल पहुंचा हूं. काठमांडू में हालात काफी खराब है.
