चिरैया के खरतरी से दोनों की हुई गिरफ्तारी, पुलिस ने भेजा जेल
कुछ ही सालों में काफी धन अर्जित कर चुका है शिक्षक भूषण
इलाके में खुद को प्रॉपर्टी डीलरहोने का पीटा करता था ढींढोरा
पंचायत चुनाव में अशोक के शपथ पत्र में नहीं था केस का जिक्र
मोतिहारी : चिरैया के खरतरी से बिहार के चर्चित मधुबन नक्सली धमाके में शिक्षक भूषण पासवान व पंचायत समिति सदस्य अशोक पासवान की गिरफ्तारी के बाद सिस्टम पर सवाल उठने लगा है. दोनों 14 साल तक शराफत का चोला पहन पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे.
न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर दोनों का चेहरा बेनकाब हुआ. उनकी गिरफ्तारी के बाद इलाके के लोग हैरान हैं. शिक्षा के मंदिर में उनके बच्चों को तालीम देने वाले शिक्षक का हाथ गुनाहों में डूबा हुआ है. अशोक का चेहरा बेनकाब होने के बाद लोगों को उसे अपना प्रतिनिधि चुनने पर भी पछतावा हो रहा है.
बताया जाता है कि मधुबन में 22 जून 2005 को एक साथ थाना, प्रखंड कार्यालय, बैंक व मंत्री सीताराम सिंह के आवास पर सैकड़ों की संख्या में हथियारबंद नक्सलियों ने हमला किया था. उसमें बैंक गार्ड रूपनारायण सिंह, थाना के सिपाही नसीर के अलावे सीआरपीएफ जवान नक्सलियों की गोली से शहीद हुए थे. इस घटना के एक साल बाद यानी 2006 में नियोजित शिक्षक के रूप में भूषण पासवान की बहाली हो गयी.
तब से वह राजकीय प्राथमिक विद्यालय खरतरी में बच्चों को तालिम दे रहा था. उसके पिता रामबली पासवान भी शिक्षक थे. फिलहाल वे रिटायर हो चुके है. वहीं, अशोक के संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 के पंचायत चुनाव में वह पंचायत समिति सदस्य के पद पर खरतरी मध्य पंचायत से चुनाव लड़ा था, जिसमें उसकी जीत हुई थी.
