कहां गुम हो गयी नप की जमीन, 311 की जगह बची है सिर्फ छह एकड़
लैंड रजिस्टर भी गुम हो गयी मोतिहारी : कभी सैकड़ों एकड़ जमीन का मालिक रही नगरपालिका (अब नगर परिषद) के पास अब कुछ ही एकड़ जमीन बची है. सरकारी व गैरसरकारी जमीन पर कब्जे की होड़ में नप की जमीन सिकुड़ रही है. मोतिहारी नगरपालिका का गठन 1879 में हुआ था. उस समय नगरपालिका के […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
लैंड रजिस्टर भी गुम हो गयी
मोतिहारी : कभी सैकड़ों एकड़ जमीन का मालिक रही नगरपालिका (अब नगर परिषद) के पास अब कुछ ही एकड़ जमीन बची है. सरकारी व गैरसरकारी जमीन पर कब्जे की होड़ में नप की जमीन सिकुड़ रही है. मोतिहारी नगरपालिका का गठन 1879 में हुआ था. उस समय नगरपालिका के पास करीब 310 एकड़ जमीन थी.
वैसे अपुष्ट सूत्र 130 एकड़ जमीन बता रहे हैं. करीब दो दशक पूर्व नगरपालिका के जमीन की जांच हुई तो 30 एकड़ जमीन चिह्नित किया गया, जिसमें फिलवक्त पांच से छह एकड़ जमीन है. पुराना लैंड रजिस्टर गायब है. तत्कालीन नप सभापति प्रकाश अस्थाना ने जांच करायी थी तो जमीन का लैंड रजिस्टर भी बना जो नगर परिषद में उपलब्ध है.
धर्मसमाज में था चार बीघा जमीन : नगरपालिका की जमीन धर्मसमाज पोखर के पास करीब चार बीघा थी, जिसमें दो बीघा जमीन धर्मसमाज स्कूल को दिया गया. 12 कठ्ठा जमीन का लीज धर्मसमाज को ही था, जिसमें छह कठ्ठा का लीज कालांतर में समाप्त हो गया. कुछ ऐसे भी जमीन है, जिसपर नगर परिषद द्वारा नोटिस किया गया लेकिन नोटिस को नजरअंदाज कर जमीन का महादा किसी फर्जी व्यक्ति द्वारा बनाया गया है.
कचरा प्रोसेसिंग के लिए एक एकड़ : नगर परिषद से निकलनेवाले कचरा का प्रोसेसिंग कर कंपोस्ट बनाने के लिए करीब तीन करोड़ की लागत से कचरा प्लांट लगाया गया. इस प्लांट के लिए करीब एक एकड़ जमीन दिया गया, लेकिन तीन वर्षो में कचरा प्लांट का लाभ लोगों को नहीं मिला, उल्टें एनएच 28 किनारे कचरा फेंके जाने से आसपास के मोहल्लेवालों व एनएच से गुजरनेवालों की सांस बदबू से रुक जा रही है.