.. तो 40% घट सकता है लीची का उत्पादन

लीची का फल सूखने व फटने के कारण किसान परेशान 1600 एकड़ में होती है पूर्वी चंपारण में लीची की खेती 1600 में करीब 400 एकड़ होती है चाइनीज लीची 41 से 44 डिग्री तक बढ़ा है तापमान मोतिहारी : लीची के नैहर के रूप में चर्चित पूर्वी चंपारण के किसान इन दिनों लीची फल […]

लीची का फल सूखने व फटने के कारण किसान परेशान

1600 एकड़ में होती है पूर्वी चंपारण में लीची की खेती
1600 में करीब 400 एकड़ होती है चाइनीज लीची
41 से 44 डिग्री तक बढ़ा है तापमान
मोतिहारी : लीची के नैहर के रूप में चर्चित पूर्वी चंपारण के किसान इन दिनों लीची फल सूखने व फटने के कारण परेशान हैं. पूर्वी चंपारण में करीब 1600 एकड़ में लीची की खेती हाेती है, जिसके लिए मुख्य क्षेत्र मेहसी, चकिया, मधुबन, तेतरिया व मोतिहारी प्रखंड के पूर्वी भाग है. लीची तोड़ कर बाजार लाने का सिलसिला शुरू हो गया है, जो 15 जून तक चलेगा.
लेकिन पिछले एक माह से बारिश नहीं होने के कारण लीची के फल अब सूखने के साथ फटने भी लगे हैं, जिसे बाहरी व्यवसायी खरीदने से परहेज कर रहे हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार अगर एक दो दिन में बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन 40 प्रतिशत तक घट सकता है. इसका असर लेट से पकनेवाले चाइनीज लीची पर भी पड़ेगा. लीची के लिए शुरुआती दौर में तापमान 20 डिग्री चाहिए, जबकि ग्रोथ के समय 30 डिग्री से उपर व 40 डिग्री से नीचे होना चाहिए, लेकिन अभी तापमान 41-43 डिग्री चल रहा है. ऐसे में लीची का फटना स्वाभाविक है.

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