संतोष की हत्या में मुकेश की संलिप्तता के मिले साक्ष्य
पुलिस के समक्ष गिरफ्तार विकास ने खोले कई राज
मोतिहारी : ढाका न्यायालय परिसर में शिवहर के अभिषेक झा की हत्या के बाद मुकेश पाठक व संतोष झा के बीच दुश्मनी गहरा हो गया था. दरभंगा के डबल इंजीनियर मर्डर से पहले मुकेश व संतोष की दोस्ती अटूट थी. अंडरवर्ल्ड में उनकी दोस्ती का मिसाल दिया जाता था, लेकिन मुकेश को जब लगा कि खतरा हम उठाते है और पैसा कमाने के साथ बॉस संतोष कहलाता है, उसके बाद से ही दोनों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया. एक समय ऐसा आया कि दोनों मन ही मन एक दूसरे को खत्म करने की प्लानिंग करने लगे. मुकेश व संतोष का खेमा बंट गया. गिरोह के कुछ बदमाश संतोष के साथ तो कुछ ने मुकेश से हाथ मिला लिया.
मुकेश खेमा में अभिषेक चला गया. पुलिस का कहना है कि संतोष की हत्या करवाने के लिए ही अभिषेक को न्यायिक अभिरक्षा से भगाने की मुकेश ने साजिश रची थी, लेकिन पासा उलटा पड़ गया. न्यायिक अभिरक्षा से भगाने आये बदमाशों की गोली से अभिषेक मारा गया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभिषेक की हत्या मुकेश व संतोष के बीच दुश्मनी में घी का काम किया. उसकी हत्या के बाद संतोष ने जेल में जश्न मनाया, जबकि मुकेश पाठक के आंखों से आंसू छलक आये थे. इस घटना के बाद मुकेश कमजोर हो गया. उसे लगा कि संतोष अगर जिंदा रहा तो उसे मार डालेगा. यही कारण है कि उसने जेल में बैठे संतोष को मरवा डाला. बताते चले कि संतोष झा की हत्या में गिरफ्तार विकास कुमार चकिया कुंअवा का रहने वाला है. चकिया से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर मेहसी मरुआवाद है, जो मुकेश का पैतृक घर है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर मुकेश पाठक से विकास का संपर्क कैसे हुआ.
