काली मिर्च तस्करी का सुरक्षित मार्ग बना घोड़ासहन-ढाका
मोतिहारी : कभी पोस्तादाना तस्करी के लिए चर्चित नेपाल सीमावर्ती घोड़ासहन, ढाका व चैनपुर क्षेत्र इन दिनों काली मिर्च तस्करों का सुरक्षित मार्ग बन गया है. जानकारों के अनुसार प्रतिदिन सात से आठ पिकअप काली मिर्च घोड़ासहन के अगरवा, कुंडवाचैनपुर के महंगुआ व आदापुर-छौड़ादानों से बिहार व दूसरे प्रदेशों के लिए भेजी जा रही है. […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
मोतिहारी : कभी पोस्तादाना तस्करी के लिए चर्चित नेपाल सीमावर्ती घोड़ासहन, ढाका व चैनपुर क्षेत्र इन दिनों काली मिर्च तस्करों का सुरक्षित मार्ग बन गया है. जानकारों के अनुसार प्रतिदिन सात से आठ पिकअप काली मिर्च घोड़ासहन के अगरवा, कुंडवाचैनपुर के महंगुआ व आदापुर-छौड़ादानों से बिहार व दूसरे प्रदेशों के लिए भेजी जा रही है. एक सप्ताह के अंदर राजस्व व सूचना निदेशालय की टीम ने छापेमारी कर लाखों की काली मिर्च जब्त की है. सोमवार को ढाका आजाद चौक, गांधी चौक व रकसा के पास से जब्त तीन पिकअप काली मिर्च कुंडवाचैनपुर के चंदन नामक व्यक्ति का था,
जिसे चकिया के शिवशंकर नामक किराना दुकानदार को पहुंचाना था. इसके एक सप्ताह पूर्व भी निदेशालय की टीम ने ढाका क्षेत्र से लाखों रुपये की काली मिर्च जब्त की थी. दो माह पूर्व चिरैया पुलिस ने डीएसपी आलोक सिंह के नेतृत्व में छापेमारी कर गंगापीपर के पास से तस्करी का समान जब्त किया था. मामले में धंधेबाज चैनपुर व घोड़ासहन के थे. मंगलवार को हुई जब्ती में तस्करों की पहचान करसहिया, ढाका, महंगुआ, शीतलपट्टी आदि के थे. ऐसे में सवाल उठता है कि स्थानीय कस्टम क्या कर रही है कि राजस्व परिषद की टीम आकर मोतिहारी इलाके में काली मिर्च तस्करों के खिलाफ अभियान चला रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी
कस्टम छापेमारी के लिए टीम गठित की है. सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा प्रमुख मार्गों पर जांच आरंभ कर दी गयी है. अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण कुछ नये अधिकारी आये हैं, जिन्हें जिले का लोकेशन पता करने में समय लग रहा है. उन्होंने कहा कि तस्करों के खिलाफ मजबूती से अभियान चलाया जायेगा.
शुभेंदू सान्याल, एसी मोतिहारी कस्टम
तस्करों का है अपना कोड वर्ड
काली मिर्च तस्करी के बावत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंडोनेशिया व वियतनाम से नेपाल में उपयोग के लिए आपूर्ति होती है. वियतनाम में इसकी दर 200 रुपये प्रति किलो है. नेपाल पहुंचने पर तस्कर उसे 350 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदते हैं और इंडिया में 450-600 रुपये प्रतिकिलो की दर से बेंचते है. आदापुर में शंभू संतोष गिरोह सक्रिय है तो कुंडवाचैनपुर में उबोध कंपनी तो घोड़ासहन अगरवा बोर्डर पर गुड्डू कंपनी का अपना जलवा है. कहते है कि इनका साठगांठ स्थानीय से लेकर वरीय स्तर तक के जांच अधिकारियों से है. आदापुर के रास्ते मक्के की तस्करी नेपाल से अब इंडिया में हो रही है. इंडिया में पक्के का पॉपकर्न बनाया जाता है, जिसके कारण तस्करों को अच्छी आय हो जाती है. शटरकटवा गिरोह की तरह काली मिर्च व मक्का तस्करों का अपना कोड वर्ड है, जो मोबाइल व आपस में कोड वर्ड में बात करते हैं.