मोतिहारी : अस्पताल में बेटे की लाश के सामने पिता खामोश खड़े थे, जबकि मौत से अंजान मां चौखट पर बैठ बेटे के घर आने का इंतजार कर रही थी. उसे मालूम था कि किसी ने उसके बेटे को गोली मार दी है, लेकिन गोली लगने से उसकी मौत हो गयी, इस बात से वाकिफ नहीं थी. सिर्फ मां ही नहीं घर की तमाम औरते इस उम्मीद में थी कि उनका लाल (छोटू) ठीक होकर घर वापस आयेगा. इसी गम में डूबे थे लोग, तभी छोटू की मौत की खबर उन तक पहुंची. उसके बाद का नजारा रोंगटे खड़े करने वाला था.
पागलों की तरह छोटू की चाची रोते-चिल्लाते सड़क की तरफ भागी, तो मां कमरे से निकलते ही दहाड़ मार बेहोश हो गयी. भाभी रानी जायसवाल की हालत भी खराब थी.उन्हें पकड़ने, समझाने व ढाढ़स बंधाने में लोग लगे थे.दरवाजे पर खड़े मुहल्ले के तमाम लोग मायूस थे. उनकी आंखें नम थी. बच्चे भी फफक-फफक कर रो रहे थे. दरवाजे पर लाश पहुंचते ही लोगों की आंखों में कैद आंसू बाहर आ गये. माहौल पहले से ज्यादा गमगीन हो गया. दरवाजे पर खचाखच भीड़ थी.
ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंखें भिंगी नहीं थी. हरेक कोई का कहना था कि यह क्या हो गया, कैसे हो गया, किसने मारा छोटू को, किससे उसकी दुश्मनी थी. इस तरह के सवाल लोग एक-दूसरे से पूछ रहे थे, लेकिन इसका किसी के पास नहीं था.
