अच्छी खबर 4 कोलकाता से आये इंजीनियर की टीम ने की जिले के चार झील क्षेत्रों की मापी की
मोतिहारी : मन विकास योजना के लिए चयनित पूर्वी चंपारण के चार झीलों को मछली पालन के लिए विकसित किया जायेगा. केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली स्वीकृति के बाद झील के विकास की कार्य योजना पर कार्य शुरू हो गयी है.
कोलकाता से आयी तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने चयनित मोतिहारी प्रखंड के रूलही, सिरसा, कररिया एवं पीपराकोठी के मझरिया झील के जल क्षेत्र की मापी की. पैमाइश में झील क्षेत्र के जलाशय का रकवा करीब तीन लाख 50 हजार हेक्टेयर प्राप्त हुआ है. जिसमें वैज्ञानिकों की देखरेख में केज, पेन एवं तालाब विधि से मछली पालन होगी.
झील डेवलपमेंट पर आनेवाली लागत खर्च नेशनल फिसरीज डेवलपमेंट बोर्ड(एनएफडीबी) हैदराबाद उपलब्ध करायेगी. झील विकास के लिए तैयार डीपीआर राशि तकरीबन दो करोड़ 60 लाख रुपये की है. वही झील के विकास के लिए सिफरी बैरकपुर कोलकत्ता को कार्य एजेंसी बनाया गया है.
तीन वर्षीय झील विकास के कार्य योजना में इंफ्रास्ट्रक्चर डेब्लपमेंट, मछली पालन की तकनीकी देखरेख सहित तमाम कार्य की जिम्मेवारी एजेंसी की होगी. जानकारी के मुताबिक एनएफडीबी मुफ्त बीज उपलब्ध करायेगी. पहले वर्ष के उत्पादन से प्राप्त आय दुसरे एवं तीसरे वर्ष मछली पालन पर खर्च की जायेगी. वही राशि कम पड़ने पर संबंधित समितियों से आर्थिक सहयोग लिया जायेगा. कार्य-योजना के मुताबिक मन के उत्पादन को दोगुना बढ़ाने का लक्ष्य है.
मछली पालन के अनुकूल वातावरण एवं मन की क्षमता को देखते हुए विशेषज्ञों ने प्रति हेक्टेयर एक हजार क्विंटल मछली उत्पादन होने की संभावना जतायी है. फिश फॉर्मिंग को लेकर कोलकाता की कार्य एजेंसी ने कार्य शुरू कर दी है. बताया जाता है कि झील पर नजर रखने के लिए एजेंसी स्थानीय स्तर पर अपनी कर्मियों को बहाल कर तैनात करेगी. प्रत्येक झील की देखरेख के लिए एक-एक कर्मी एवं एक पर्यवेक्षक तैनात किये जायेंगे. जो झील से संबंधित फिश फॉर्मिंग पर नजर रखेगी.
इसको लेकर हाल ही में एजेंसी के आये विशेषज्ञों की टीम ने केविके में युवाओं का साक्षात्कार भी लिया है. जानकारी के मुताबिक झील के लिए सीड भी स्थानीय स्तर पर हेचरी से ली जायेगी.
दो करोड़ 60 लाख खर्च कर
होगा झील का विकास
केज व पेन विधि से विशेषज्ञों की देखरेख में होगा मछली पालन
तीन साल की कार्ययोजना में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य
झील विकास एवं मछली पालन को लेकर कार्य शुरू हो गयी है. दिसंबर माह से केज एवं पौंड पर काम होगा. झील में नेचुरल फिडिंग की उपलब्धता से कम खर्च में अधिक उत्पादन प्राप्त होने की अपार संभावनाएं है.
डॉ गणेश चंद्रा, विशेषज्ञ, सिफरी बैरकपुर कोलकाता
