जनवरी में पांच तारीख के बाद अमरनाथ व दिसंबर में सप्तक्रांति का मिलेगा टिकट

मोतिहारी : पर्व पर प्रदेश से घर आनेवाले लोगों को रेल मार्ग से वापसी के लिए प्रतीक्षा करनी होगी. अगर आपने वापसी का ट्रेन टिकट नहीं लिया है तो महीनों इंतजार करना पडेगा. चूंकि लंबी दूरी की तकरीबन अधिकांश ट्रेनों में अभी से नो रूम चल रहा है. ऐसे में जल्द वापसी के लिए ट्रेन […]

मोतिहारी : पर्व पर प्रदेश से घर आनेवाले लोगों को रेल मार्ग से वापसी के लिए प्रतीक्षा करनी होगी. अगर आपने वापसी का ट्रेन टिकट नहीं लिया है तो महीनों इंतजार करना पडेगा. चूंकि लंबी दूरी की तकरीबन अधिकांश ट्रेनों में अभी से नो रूम चल रहा है. ऐसे में जल्द वापसी के लिए ट्रेन की बजाय दूसरे विकल्प तलाशना होगा.

कुछ ट्रेनों को छोड़ दिसंबर से पहले किसी ट्रेन में टिकट नहीं मिलेगी. जानकारी के मुताबिक दिल्ली के लिए 12557 सप्तक्रांति सुपर ट्रेन में 5 दिसंबर तो 15653 अमरनाथ एक्सप्रेस में 5 जनवरी के बाद ही टिकट मिलेगा. 19270 पोरबंदर एक्सप्रेस में 20 नवंबर,19040 अवध एक्सप्रेस में 18 नवंबर,13022 मिथिला एक्सप्रेस में 10 नवंबर,12211 गरीब रथ में 12 नवंबर एवं 14009 चंपारण सत्याग्रह एक्सप्रेस में 13 नवंबर तक टिकट बुक है. उक्त तिथि के बाद भी संबंधित ट्रेनों में सफर के लिए यात्रा टिकट उपलब्ध होगी.

सृष्टिकाल से सूर्यषष्ठी व्रत का है विधान
सूर्यषष्ठी व्रत का विधान सृष्टिकाल से चला आ रहा है. वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि यह व्रत सत्युग में नागकन्या के उपदेश से शर्याति नामक राजा की पुत्री व च्यवन ऋषि की पुत्री सुकन्या ने किया था. भगवान राम ने सूर्योपासना करके ही रावण पर विजय प्राप्त की थी. महारथी कर्ण ने सूर्योपासना से ही कवच कुंडल प्राप्त किए थे. इसक साथ ही धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्योपासना से ही राज्यलक्ष्मी पुन: प्राप्त किया था.

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