पापड़हाता व वार्ड छह के सात हजार लोगों की बढ़ने वाली है परेशानी
मेन रोड के दुकानदारों को हाइकोर्ट से नहीं मिला संतोषजनक जवाब
आरटीआइ से हुआ खुलासा
चक्रधरपुर : चक्रधरपुर में बन रहा ओवर ब्रिज एक बार फिर विवादों में आ गया है. इस बार जनहित का ख्याल नहीं रखे जाने के कारण विवाद गरमा गया है. निर्माणाधीन ब्रिज के दुकानदारों ने जनहित की दुहाई देते हुए हाइकोर्ट की शरण में गये थे, लेकिन वहां से भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. आरटीआइ के तहत रेलवे से मांगी गयी जानकारी में रेलवे ने पैदल पथ नहीं बनाये जाने और वर्तमान समपार फाटक को बंद करने की जानकारी दी है. ऐसा हुआ तो एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित होगी.
रेलवे ने दिया जवाब : रेलवे से ओवरब्रिज पर वर्तमान समपार फाटक को खुला रखने और पापड़हाता व वार्ड-6 के करीब सात हजार लोगों के लिए पैदल पथ व सीढ़ी बनाये जाने की मांग की थी, लेकिन रेलवे ने इससे इनकार कर दिया है. कहा गया है कि नीचे से पैदल चलने का रास्ता है, इसलिए ओवरब्रिज में पैदल पथ नहीं बनेगा और ब्रिज का निर्माण होने के बाद ही समपार फाटक को बंद कर दिया जायेगा. ओवर ब्रिज से नीचे आने जाने के लिए सीढ़ियां भी नहीं बनायी जायेंगी.
सीढ़ियां नहीं बनने से पापड़हाता व वार्ड-6 के लोग काफी परेशान होंगे. उन्हें काफी दूर पैदल जाने के बाद ब्रिज तक पहुंच सकेंगे. वर्तमान फाटक बंद होने से भी उन्हें बहुत दूर घूम कर जाना पड़ेगा. हाइकोर्ट ने भी इस मामले पर फैसला देते हुए कहा कि रेलवे और कंस्ट्रक्शन कंपनी से संपर्क कर मामले का हल निकाला जा सकता है.
5 के बजाय 7 पिलर की मांग : असलम चौक से पवन चौक के बीच बन रहे ओवरब्रिज में वर्तमान में केवल 5 पिलर बनाये जाने का प्रावधान है. इससे उर्दू हाइस्कूल से पवन चौक तक दीवार उठ जायेगी. इससे बड़ी संख्या में दुकानदारी, कारोबाद आदि प्रभावित होंगे. इस क्षेत्र के दुकानदारों की मांग है कि मात्र 2 और पिलर बढ़ा कर 7 कर दिया जाये. इससे दुकानदार प्रभावित नहीं होंगे.
जनहित के लिए उठायी आवाज : अशरफ. जनहित को लेकर हाइकोर्ट व रेलवे में आवाज उठाने वाले पूर्व वार्ड पार्षद मो अशरफ ने कहा है कि ब्रिज निर्माण से आपत्ति नहीं है. सिर्फ इस कार्य में जनहित की सुविधाअों का ख्याल रखा जाये.
केवल 7 पिलर, ओवर ब्रिज से नीचे उतरने की सीढ़ी और पैदल पथ की मांग पूरी होने से हजारों लोगों को सहूलियत होगी. वर्तमान समपार फाटक को खुला रखने से भी लोगों को लाभ होगा. लेकिन किसी भी मुद्दे पर राज्य सरकार या रेल प्रशासन जनहित का ख्याल नहीं रख रहा है.
