मोतिहारी : इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कॉम पुकारेगा हमारे हैं हुसैन, पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की याद में रविवार को जिले भर में मुहर्रम मनाया गया और उन्हें शिद्दत से याद किया गया. ज्ञानबाबू चौक स्थित अंजुमन ए-इमामिया शिया असना अशरी में हुसैन की याद में मजलिस आयोजित की गयी और करबला के मैदान में यजीद द्वारा किये गये जुल्म की दास्तां पर विस्तार से चर्चा की गयी.
मौलाना इरशाद अब्बास आबदी ने कहा कि 61 हिजरी में यजीद नाम का एक शख्स था जो अल्लाह की दीन को मिटाने व अपना मजहब चलाने की कोशिश कर रहा था जिसका इमाम हुसैन ने जमकर विरोध किया.इमाम हुसैन ने यजीद के दीन को नहीं चलने दिया और शहीद हो कर अपने नाना के दीन को बचा लिया.
करबला में तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहे और शहीद हो गये. यजीद ने बच्चों व महिलाओं का पानी बंद करते हुए हैवानियत की सारी हदें पार कर दी और जुल्म की सभी सीमाएं तोड़ दी. मौलाना की यह तारिखी गुफ्तगू सन पूरा माहौल गमगीन हो गया और आंसू बाहर निकल आए.
पूरा माहौल मातम में डूबा रहा और करबला के इस वाक्यात को याद कर लोग रोते रहे.मौके पर अंजुमन के सचिव शमशेर अली रिजवी,असगर अली रिजवी,सैयद इजहार हुसैन,सैयद मनौवर हुसैन,सैयद हैदर मेहदी,सैयद जॉन रिजवी,तनवीर रिजवी,अनवर हुसैन,सैयद सफदर हुसैन,सादिक हुसैन,शाह मो. यूसुफ, आलम दार हुसैन,हसन अली व रेहान रिजवी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
निकला जुलूस,भांजी गयी लाठियां : मुहर्रम के दिन ताजिया जुलूस निकाला गया. विभिन्न मुहल्लों से यह जुलूस निकला जहां लोगों ने जमकर लाठियां भांजी और अपना करतब दिखाये.शहर के अगरवा,बलूआ,चीकपट्टी,अमला पट्टी व नकछेद टोला सहित कई मुहल्लों से ताजिया जुलूस निकला.इधर जुलूस को ले प्रशासन मुस्तैद था और हर तरह के गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गयी थी.सारी रात लोगों ने लाठियां भांजी और अपने-अपने ढंग से मुहर्रम मनाया.
