सूरत-ए-हाल. साक्षरता महापरीक्षा की खुली पोल, डीपीओ ने पूछा स्पष्टीकरण
कहीं नदारद थे नवसाक्षर तो कहीं बंद मिला केंद्र
मोतिहारी : महादलित, अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा को अक्षर आंचल योजना एवं साक्षर भारत मिशन अंतर्गत रविवार को आयोजित बुनियादी साक्षरता महापरीक्षा की पोल खुल गयी है. प्रत्येक महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी योजना पूर्णत: धरातल पर नहीं दिख रही है. महापरीक्षा के दिन कहीं केंद्र बंद मिले तो कहीं नवसाक्षर महिलाओं के जगह बच्चे परीक्षा दे रहे थे.
इस बात का खुलासा साक्षरता डीपीओ सुनील कुमार गुप्ता के द्वारा महापरीक्षा के निरीक्षण के दौरान हुआ. डीपीओ ने बताया कि मध्य विद्यालय चैलाहां बंजरिया 11 बजे बंद मिला. वहीं बंजरिया के मध्य विद्यालय झकियां पर नवसाक्षर महिलाएं उपस्थित नहीं थी. यूएमएस भेला छपरा में नवसाक्षर महिलाओं की जगह बच्चे परीक्षा दे रहे थे. मध्य विद्यालय फुलवरिया में एक भी परीक्षार्थी केंद्र पर उपस्थित नहीं थे. सुगौली के यूएमएस बेलवतिया में परीक्षार्थी थे. रामगढ़वा के यूएमस मुरला में विद्यालय बंद पाया गया. यहां नवसाक्षर, टोला सेवक शिक्षक नदारद थे.
वही मध्य विद्यालय कन्या रामगढ़वा बंद मिला, जबकि मध्य विद्यालय लक्ष्मीपुर रक्सौल पर परीक्षार्थी उपस्थित नहीं थे. इस संबंध में पूछे जाने पर डीपीओ ने बताया कि यह गंभीर मामला है. इसको लेकर संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब किया जायेगा. जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई की जायेगी. परीक्षा को लेकर बनाये गये नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षा में कुल एक लाख 10 हजार 139 नवसाक्षरों ने पंजीयन कराया था, जिसमें से 96 हजार 934 नवसाक्षर परीक्षा में शामिल हुए.
