मोतिहारी : बेड पेमेंट के नियम को दरकिनार कर प्रसव का लाभ भुगतान में मरीजों को लेट कर होता है शोषण का खेल. अंतत: परेशान मरीज कर्मी से समझौता करते है या पांच छह बार अस्पताल का दौरा लगाने के बाद भुगतान पाते हैं. इसके अलावा टीकाकरण कार्य में लगे करीब एक हजार कर्मी व करीब चार हजार आशा कार्यकर्ताओं को कार्य के एवज में भुगतान की समस्या आंदोलन को बाध्य कर देती है.
प्रसूताओं को नहीं मिल रहा सरकारी लाभ
मोतिहारी : बेड पेमेंट के नियम को दरकिनार कर प्रसव का लाभ भुगतान में मरीजों को लेट कर होता है शोषण का खेल. अंतत: परेशान मरीज कर्मी से समझौता करते है या पांच छह बार अस्पताल का दौरा लगाने के बाद भुगतान पाते हैं. इसके अलावा टीकाकरण कार्य में लगे करीब एक हजार कर्मी व […]

जानकारी के अनुसार जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव पर 14 सौ पीड़ित को और 600 रुपये आशा को ऑन बेड भुगतान करना है,
इसके अलावा प्रसव के समय 600 रुपये का दवा देनी है. लेकिन ऐसा नहीं होता है. भुगतान में लेट करने पर कार्यालय में चार से पांच बार चक्कर लगाना पड़ता है, तब जाकर समझौता नीति के तहत भुगतान किया जाता है. सूत्रों के अनुसार पूर्वी चंपारण के अस्पतालों में सालाना 50 हजार प्रसव होता है और सदर अस्पताल में करीब 14-15 हजार. इसमें करीब 20 हजार प्रसव पीड़ित का लाभांश राशि बकाया है. कार्यालय में पूछने पर कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखा लिपिक को, लेखा लिपिक चेक वितरक को बताने की बात कहते हैं, लेकिन सही में बकाया कितने का है. अधिकारी के साथ कर्मी को भी पता नहीं.
सूत्रों का कहना है कि प्राथमिकी से सदर तक, कहीं पंजी का संधारण नहीं होता है. अगर कहीं होता है तो सही मिलान नहीं हो पाता. अधिकारी के निरीक्षण में मैनेज का खेल होता है. विभाग का कहना है कि प्रसव के समय पीड़िता पासबुक का फोटो कॉपी नहीं लातीं हैं, जो लाती भी है उसमें खाता नंबर स्पष्ट नहीं होता, जिसके कारण भुगतान में विलंब होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि दो से चार वर्ष का बकाया क्यों है. क्या सबका फोटो स्टेट गलत होता है.
नहीं होता है ऑन बेड पेमेंट
किसी के पास नहीं है सही आंकड़ा
आशा व टीकाकरण कर्मी भी परेशान
जन्म प्रमाणपत्र के लिए लगाना
पड़ता है चक्कर
मामला जननी सुरक्षा योजना का
एक नजर प्रसव पर
माह सामान्य ऑपरेशन प्रसव
अप्रैल 776 28
मई 743 34
जून 714 33
जुलाई 966 33
अगस्त 1232 30
फिल्ड में हूं. कितने का जननी सुरक्षा योजना में बकाया है. पूरा फिगर याद नहीं है, जो बकाया है प्राथमिकता के आधार पर भुगतान होगा. किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई होगी.
डाॅ प्रशांत कुमार, सिविल सर्जन, पूर्वी चंपारण
डिस्चार्ज के समय नहीं मिलता जन्म प्रमाणपत्र
प्रसुताओं को ऑन बेड पेमेंट के साथ एक समस्या यह है कि जन्म लेनेवाले बच्चों को डिस्चार्ज के
समय जन्म प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता है. इस कारण उन्हें परेशानी होती है. जानकारों का कहना है कि एक उच्चस्तरीय टीम गठित कर जांच की जाये तो जननी सुरक्षा योजना, टीकाकरण में आशा व अन्य को भुगतान में बड़ी गड़बड़ी उजागर हो सकती है.