संसार से भागो नहीं कथा के दौरान बोले कथावाचक पराशर

भगवान व भक्त के बीच पारस्परिक संबंधों पर विस्तार से डाला प्रकाश मोतिहारी : हृदय को शुद्ध करने के लिए कीर्तन व प्रार्थना करो. प्रार्थना में भाषा नहीं भाव प्रधान होते हैं. गुरु और परमात्मा का अनुसंधान मत करो. भटक जाओगे. तुम अपने हृदय को इतना विशाल बना लो की परमात्मा तुम्हें ढ़ूंढ़ते-ढ़ूंढ़ते तुम्हारे घर […]

भगवान व भक्त के बीच पारस्परिक संबंधों पर विस्तार से डाला प्रकाश

मोतिहारी : हृदय को शुद्ध करने के लिए कीर्तन व प्रार्थना करो. प्रार्थना में भाषा नहीं भाव प्रधान होते हैं. गुरु और परमात्मा का अनुसंधान मत करो. भटक जाओगे. तुम अपने हृदय को इतना विशाल बना लो की परमात्मा तुम्हें ढ़ूंढ़ते-ढ़ूंढ़ते तुम्हारे घर आये और कहे कि भक्त दरवाजा खोलो में परमात्मा तुम्हारे द्वार खड़ा हूं.
ये उद्गार शहर के छोटा बरियारपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में जारी महायज्ञ व अमृत रस वर्षा कथा के चौथे दिन बुधवार को कथा वाचक उपेंद्र पराशर जी महाराज ने व्यक्त किये. कहा कि भक्ति में समर्पण का भाव होना आवश्यक है. समर्पण के बिना भक्ति अधूरा है. मानव जीवन पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि मानव जीवन का लक्ष्य पुरुषार्थ-चातुष्ट्य की प्राप्ति है, धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष. इसमें धर्म, अर्थ व काम सोपान है. वहीं मोक्ष परम लक्ष्य है.
महाराज जी ने सांसारिक जीवन पर वृतांत चित्रण कर राजा परिक्षित व भगवान श्री शुक्रदेव के बीच हुए संवाद का जिक्र किया. इसमें राजा परिक्षित के द्वारा मुक्ति विषयक प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान श्री शुक्रदेव ने कहा कि संसार से भागकर कहां जाओगे. जहां भी जाओगे संसार आपका पीछा करेगा. अत: संसार से भागो नहीं बल्कि संसार को अपने अंदर से भगाओ मुक्ति मिल जाएगी. प्रवचन के दौरान श्री उपेंद्र जी ने सुदूर क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं को भगवान व भक्त के बीच पारस्परिक संबंधों पर विस्तार से बताया. मौके पर पप्पू पांडेय, सुरेश सिंह, निखिल, भोला चौधरी, विनय प्रसाद, संतोष कुमार मिश्र, अभिजीत तिवारी आदि उपस्थित थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >