कहा, मृत्यु के बाद का विषय नहीं है धर्म
रामायण व भागवत को बताया महत्वपूर्ण ग्रंथ
शहर के छोटा बरियारपुर स्थित अमृत रस वर्षा कथा
मोतिहारी : भारतीय वांग्यमयी में दो ग्रंथ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. एक रामायण व दूसरा भागवत. रामायण की कथा जीवन की कथा है. वहीं भागवत की कथा मुक्ति की कथा. धर्मांचरण कथा या यज्ञ धरती से स्वर्ग जाने मात्र का साधन नहीं है.
बल्कि धरती को स्वर्ग बनाने का साधन है. ये उदगार शहर के छोटा बरियारपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय महायज्ञ व अमृत रस वर्षा कथा में दिल्ली से पधारे प्रवचक उपेंद्र पराशर जी महाराज ने व्यक्त किये. कहा कि इससे आध्यात्मिक चेतना के विकास के साथ-साथ मनुष्य के चरित्र निर्माण भी होता है. भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराजजी ने भागवत को कलयुग में कल्पवृक्ष के सामान बताया. कलयुग के मनुष्य का उद्धार कैसे होगा. इस पर भगवान श्रीकृष्ण व उद्धव के बीच संवाद को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि द्वापर के अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव से कहा कि कलयुग मनुष्य का उद्धार कैसे होगा.
इसके उत्तर में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं भागवत में प्रवेश कर रहा हूं. भागवत मेरी वांग्यमयी मूर्ति होगी. इसके माध्यम से कलयुग के मनुष्यों को सात दिनों मात्र में ही कल्याण हो जायेगा. महाराज जी ने धर्म क्या है?. श्रद्धालुओं को इससे भी रूबरू कराया. कहा धर्म जीवन जीने की पद्धति है, न ही मृत्यु के बाद का विषय. भारतीय संस्कृति को जितना क्षति नास्तिकों से नहीं हुई. उतनी क्षति अद्धआस्तिकों से हुई है. इसलिए कि उन्होंने धर्म को मृत्यु के बाद का विषय बना लिया. प्रवचन के दौरान उन्होंने भजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया. मौके पर सुरेश सिंह, पप्पू पांडेय, निखिल, भोला चौधरी, विनय प्रसाद, संतोष कुमार मिश्र, अभिजीत तिवारी, रमेश प्रसाद आदि उपस्थित थे.
