बक्सर. गुरुवार को बक्सर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्र में वोट डाले जा रहे थे. वहीं, जिले के चौसा, डुमरांव, नावानगर और राजपुर प्रखंड की कुछ पंचायतों में मनरेगा के तहत काम कराते फोटो विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किया गया है. जबकि, लोकतंत्र के इस महापर्व को लेकर सार्वजनिक अवकाश रहा.
बावजूद इसके गुरुवार को मनरेगा की विभागीय वेबसाइट पर कुल 106 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है. इस काम में ग्राम पंचायत के मनरेगा जेइ रोजगार सेवक से मिलकर एप पर गूगल से फर्जी फोटो अपलोड कर मजदूरों की हाजिरी लगायी गयी है. मजेदार बात तो यह है कि तीन नवंबर से लेकर सात नवंबर तक लगातार दोनों योजना में एक ही फोटो अपलोड है. लोगों का कहना है कि मनरेगा के भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं. ये तब है, जब सरकार द्वारा मनरेगा कार्यों पर निगरानी के लिए जीओ टैगिंग लागू की गयी है. राजपुर प्रखंड में कई योजनाओं में इन दिनों मनरेगा का काम चल रहा है. मास्टर रोल में मजदूरों कस जॉब कार्ड लगाकर हाजिरी लगायी जा रही है. हैरत की बात यह है कि यह सब अधिकारियों को दिखायी नहीं दे रहा है या जानबूझ कर लूट की छूट दी गयी है.दो योजनाओं में एक ही फोटो अपलोड
राजपुर प्रखंड के योजना संख्या 20797235 खीरी पंचायत में सोनी ग्राम में मल्लू राजभर के घर से सतीधर राजभर के घर तक नाली और पेवर ब्लॉक और उसी पंचायत के योजना संख्या 20797236 खीर के सोनी ग्राम में कमलेश सिंह के घर से अशोक राय के घर होते हुए नारा तक नाली पेवर ब्लॉक कार्य इन दो अलग-अलग योजनाओं में 7, 6, 5, 4 व 3 नवंबर को हुए कार्य में पांच दिनों में एक ही फोटो अपलोड कर 22 मास्टर रोल निकाल कर 106 मजदूरों की हाजिरी लगायी गयी है. मनरेगा की वेबसाइट पर उपलब्ध फोटो का विश्लेषण करने पर पता चल रहा है कि फोटो से फोटो लेकर अपलोड किया गया है, जिससे कुछ दिन बाद मिलीभगत से लाखों का घोटाला किया जा सके.मनरेगा अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि श्रमिकों की ओर से किये गये कार्यों का मनरेगा पोर्टल पर अपलोड फोटो को ही देखकर आकलन भी सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. जिले के राजपुर, डुमरांव, नावानगर व इटाढ़ी प्रखंड में कार्यस्थल के अपलोड फोटो को ही देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि श्रमिकों के असली फोटो के बजाय फोटो से ही फोटो एनएमएमएस (राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली) पोर्टल अपलोड किये जा रहे हैं. यह पूरा खेल सिर्फ मानव दिवस बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. जबकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही है. कार्यस्थल पर मिट्टी की खोदाई हुई भी नहीं है और रोजगार सेवक पोर्टल पर श्रमिकों की अब भी हाजिरी लग रही है. हैरत कि बात यह है कि कार्य का सत्यापन करने वाले अधिकारी भी आंख बंद करके सत्यापन कर दे रहे हैं. इधर, मनरेगा निदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि इस तरह का काम कैसे किया जा रहा है. यह जांच का विषय है. चुनाव के बाद इन सभी योजनाओं की समीक्षा की जायेगी. जिसे भी गलत पाया जायेगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जायेगी.
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