बक्सर. शहर समेत जिले भर में अक्षय नवमी का पर्व परंपरागत तरीके से श्रद्धा के साथ मनाया गया. इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान के साथ आंवला वृक्ष के पूजन-अर्चन के साथ अक्षय पुण्य की कामना कीं. कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. इसे अक्षय नवमी अथवा आंवला नमी के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान-पुण्य अथवा अन्य शुभ कार्य का क्षय नहीं होता है. अक्षय नवमी को लेकर कार्तिक स्नान करने वाली महिला श्रद्धालु तड़के बिस्तर छोड़ नित्य क्रिया से निबटीं. इसके बाद महिलाएं गंगा अथवा अन्य नदी या तालाबों में जाकर पावन डुबकी लगाईं. स्नान आदि के बाद आचार्यों के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंध, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पित कर आंवला वृक्ष की पूजा कीं. पूजा के बीच आंवले के तने में मौली अथवा कच्चा सूत लपेटते हुए वृक्ष की परिक्रमा कीं और वस्त्र, अन्न एवं कुष्मांडा यानि भतुआ में द्रव्य डालकर पुरोहितों को गुप्त दान दिए तथा अक्षय नवमी की कथा श्रवण किए. पूजन-अर्चन के बाद महिला श्रद्धालुओं द्वारा आंवला के नीचे पुआ-पकवान व कढ़ी-चावल आदि विविध प्रकार के लजीज व्यंजन पकाए गए और भगवान को भोग लगाकर सगे-संबंधियों को खिलाए गए. आचार्यों ने बताया कि कार्तिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है. इस माह में भगवान विष्णु का वास आंवला वृक्ष में होता है. सो विधि-विधान के साथ कार्तिक स्नान कर आंवला वृक्ष की पूजा करने से भगवान श्री हरि की कृपा के साथ ही श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
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