इटाढ़ी व केसठ प्रखंड में मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर

लिहाजा मनरेगा के विभागीय वेबसाइट पर अपलोड फोटो लोगों के बीच चर्चा बना है.

बक्सर. जिले में कई प्रखंडों में मनरेगा योजना में अनियमितता का मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई नहीं किये जाने से एक ही मजदूर कहीं सीता राम तो कहीं चंद्रमा राम के नाम से अलग-अलग योजनाओं में विभागीय वेबसाइट पर फोटो में अपलोड है. जिसकी जांच करने की जरूरत विभागीय अधिकारी नहीं समझ रहे हैं. लिहाजा मनरेगा के विभागीय वेबसाइट पर अपलोड फोटो लोगों के बीच चर्चा बना है. जिले के कई प्रखंडों के विभिन्न पंचायतों में इन दिनों मनरेगा में धांधली होने का मामला विभागीय वेबसाइट पर अपलोड है. हालांकि कई दिनों से मनरेगा से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद जहां जिले के विभिन्न प्रखंडों में भले काम का रफ्तार कम हो गया हो लेकिन काम में अनियमितता किसी न किसी प्रखंड में जरूर देखने को मिल जा रही है. अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि श्रमिकों की ओर से किये गये कार्यों का आंकलन भी सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. कार्यस्थल पर जिस प्रकार से काम कराया जा रहा है. उसे देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक श्रमिक दिनभर में कितना काम कर रहा है.यह पूरा खेल सिर्फ मानव दिवस बढ़ाने के चक्कर में किया जा रहा है. यही वजह है कि केसठ प्रखंड में तो एक ही मजदूर का नाम मास्टर रोल संख्या 1596 सीता राम तो 1589 में चंद्रमा राम व 1599 संगीत देवी हो जा रहा है. मनरेगा में कराया जा रहा पौधारोपण : केसठ प्रखंड में योजना संख्या 20406232 कतिकनार के जी किरनी में दंगौली मोड़ से पानी टंकी तक पौधारोपण कार्य में जारी मास्टर रोल संख्या 1596 व योजना संख्या 20406225 कतिकनार किरनी महुवा के पेड़ से झबली सिंह के खेत तक रोड के दोनों तरफ पौधारोपण कार्य में जारी मास्टर रोल संख्या 1589 के बाद उसी पंचायत के योजना संख्या 20406241 कतिकनार के जी किरनी में श्रीराम सिंह के खेत से उत्तर आहार तक पौधारोपण कार्य ये तीनों योजना में 9 नवंबर को तीनों योजना में अपलोड फोटो में एक पुरूष मजदूर दिखायी पड़ रहा है. जबकि हर योजना में उसका नाम बदल जा रहा है. दूसरा मामला इटाढ़ी प्रखंड के योजना 2082558 ग्राम ओराप में मेन रोड से पानी टंकी हृदय यादव के घर तक पीसीसी निर्माण कार्य में 10 बजकर 6 महीने पर जो फोटो अपलोड किया गया है. वहीं फोटो दोपहर के बाद दूसरा समूह में भी 4 बजकर 50 मिनट पर अपलोड किये गये हैं. क्या कहते हैं अधिकारी जिन योजनाओं में गड़बड़ी पायी जायेगी. उसकी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. प्रशांत कुमार, मनरेगा डायरेक्टर, बक्सर न दुकान, न गोदाम और न ही प्रतिष्ठान, फिर भी बेच रहे लाखों रुपये का सामान बक्सर. जिले में मनरेगा योजना के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है. दर्जनों वेंडरों का धरातल पर न दुकान, न गोदाम और न ही कोई प्रतिष्ठान है. फिर भी कागज पर सप्लायर बनकर लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं. जिले में मनरेगा सामग्री की आपूर्ति केवल फाइलों में पूरी हो रही है. असलियत में न तो दुकानें हैं और न ही सप्लाइ. यह सिर्फ अफसरों और बिचौलियों की मिलीभगत से चल रहा है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर सिर्फ कागजी कार्रवाई करती है या फिर सचमुच दोषियों पर शिकंजा कसती है. अधिकारियों की कार्यशैली पर ही उठ रहे सवाल मनरेगा में आपूर्ति का कार्य करने वाले वेंडरों को लाइसेंस तब निर्गत किया जाता है जब जांच में यह पुष्टि हो जाती है कि जिन सामग्रियों का आपूर्ति किया जाना है उससे संबंधित उनकी प्रतिष्ठान है. प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी इसकी जांच की जानी है. बगैर प्रतिष्ठान के ही सामग्रियों की आपूर्ति से सवाल खड़े हाे रहे हैं.

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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