buxar news : केशवपुर में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप, हजारों की आबादी परेशान

buxar news : कभी ट्रांसफॉर्मर, तो कभी पाइप लिकेज का किया जा रहा बहाना

बक्सर. केशवपुर जलापूर्ति केंद्र का नया-नया कारनामा इन दिनों ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण बन गया है. पानी की आपूर्ति बंद होने के पीछे विभाग और जलापूर्ति केंद्र द्वारा हर बार अलग-अलग बहाना बनाया जाता है. कभी ट्रांसफॉर्मर जलने, कभी स्टार्टर खराब होने, तो कभी पाइप लिकेज का हवाला देकर सप्लाइ रोक दी जाती है. स्थिति यह है कि ग्रामीणों को यह समझ में नहीं आ रहा कि वास्तव में समस्या क्या है और कब तक उनकी परेशानी दूर होगी. यह पहली बार नहीं है जब जलापूर्ति बंद होने की शिकायतें सामने आयी हों. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई महीनों से लगभग हर महीने कोई न कोई बहाना बनाकर पानी की आपूर्ति दो-तीन दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रोक दी जाती है. लेकिन, इस बार समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. सोनवर्षा और गढ़नी टंकी से होने वाली आपूर्ति लगभग 15 दिनों से ठप है. इससे हजारों की आबादी के बीव पानी के लिए हाहाकार मचा है. ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआत में विभाग ने यह कहकर सप्लाइ बंद कर दी कि टंकी का स्टार्टर जल गया है. इस बहाने से 12 दिन तक पानी की सप्लाइ रुकी रही. स्टार्टर की समस्या ठीक भी नहीं हुई थी कि दो से तीन बार ट्रांसफॉर्मर जलने की बात कहकर फिर से आपूर्ति रोक दी गयी. इसके बाद जब ग्रामीणों ने बार-बार शिकायत की और विभाग का ध्यान आकृष्ट किया, तब एक नया बहाना सामने आ गया कि पाइप लिकेज है. इस लिकेज के कारण अब कई दिनों से पानी की सप्लाइ पूरी तरह बंद है. ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही का यह आलम है कि कई दिनों से पानी नहीं मिलने के बावजूद किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना भी जरूरी नहीं समझा. लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के नलों और निजी बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है. सबसे गंभीर बात यह है कि विभाग को इस दीर्घकालीन समस्या की जानकारी तक नहीं है. जब इस संबंध में कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं थी, इसे तुरंत देखवा लेते हैं. अधिकारियों की अनभिज्ञता और स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की लापरवाही ने लोगों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और विभाग की ओर से लाख दावे किये जाते हैं कि हर घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. जलापूर्ति योजना की टंकियों की न तो समय से मरम्मत होती है और न ही तकनीकी गड़बड़ियों को दूर करने की कोई तत्परता दिखायी देती है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर बार स्टार्टर और ट्रांसफॉर्मर ही क्यों जल जाता है. क्या यह तकनीकी समस्या है या जिम्मेदार विभाग के अंदरूनी खेल.

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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