बक्सर. शिव प्रसाद संस्कृत डिग्री कॉलेज, रामपुर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर रंगोत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आरंभ वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के समूह गान से हुआ. छात्राओं ने देशभक्ति के तरानों से समा बांधा. छात्राओं के प्रस्तुतीकरण के पश्चात छात्रों ने देशभक्ति के विविध आयामों पर वाद, संवाद एवं संभाषण प्रस्तुत किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिव प्रसाद संस्कृत डिग्री कॉलेज के प्राचार्य रंजीत कुमार राणा ने आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम गीत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि कैसे वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिये. कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी के प्राध्यापक डॉ आनंद कुमार शुक्ल ने वंदे मातरम के साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि यह गीत स्वाधीनता के बलिदानियों का अमरकंठ बन गया था. वेद विभागाध्यक्ष डॉ चंद्रेश उपाध्याय ने वंदे मातरम गीत का भाषिक अन्वेषण प्रस्तुत किया. ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ नीरज त्रिवेदी ने अपने संभाषण में वंदे मातरम् गीत के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया. व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ उमाकांत शुक्ल ने बताया कि कैसे बांग्ला भाषा की रचना होने के बावजूद वंदे मातरम गीत में अद्भुत ढंग से संस्कृत व्याकरण एवं निरुक्त का अनुपालन किया गया है.
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