Buxar News: मानव तन के महत्व को समझें : साधना शास्त्री

मद्भागवत कथा के माध्यम से बताया कि मनुष्य का जीवन बड़े पुण्य से मिला है

बक्सर. बालापुर स्थित बिजुलिया बाबा में चल रहे सात दिवसीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन कथा ब्रजधाम वृन्दावन से पधारी कथा वाचिका साधना शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से बताया कि मनुष्य का जीवन बड़े पुण्य से मिला है. फिर भी हम अपना अमूल्य जीवन क्षणिक विषयों के पीछे गंवा देते हैं. जिसे शास्त्रों में देव दुर्लभ कहा गया है. बड़े भाग्य मानुष तन पावा सुर दुर्लभ सद ग्रंथन गावा और ऐसे देव दुर्लभ शरीर को हम आलस्य प्रमाद शौक मौज ऐस में आराम और भोग विलास में गंवा देते हैं. जीवन रहते हम अपने आप को समझ नहीं पाते. हमारे ऋषियों ने इस क्षणभंगुर शरीर को व्याधियों का घर बताया है. बड़े बड़े महात्माओं और लोकोपकारी व्यक्तियों का भी व्याधियों से पिंड नहीं छूट पाता. हर इंसान को व्याधियों के आगे अपना सिर झुकाना पड़ता है. इस संसार में चारों तरफ दुख का ही बोलबाला है. अब प्रश्न उठता है कि इस दुख से बचने का उपाय क्या है तो शास्त्र कहता है कि स्वेक्षापूर्वक विषयों को त्यागने में ही सच्चा सुख है. जिसके पास जितना अधिक विषयों का संग्रह है वह उतना ही अधिक दुखी है. यदि हम अपने तथा संसार को सुखी देखना चाहते हैं तो हमें यथाशक्ति पापों से बचकर धर्म को संचय करना चाहिए क्योंकि धर्म से ही धन और सुख की प्राप्ति होती है. लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अध्यक्ष रविराज ओझा ने बताया कि महायज्ञ के समापन पर पांच हजार लोग का भंडारा किया जाएगा. ताकि अधिक से अधिक लोग को प्रसाद मिल सकें. इस मौके पर वैरागी, हनुमान बाबा, आचार्य सत्येंद्र शास्त्री, सोनू बाबा, सुभाष यादव, बचनी ओझा, डबलू दुबे, उमा दुबे, अटल बिहारी ओझा, रिपु दुबे शामिल रहे.

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