डुमरांव. दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा मनाया जाने वाला एक ऐसा त्योहार जिसमें कर्म की प्रधानता बताई जाती है. अंधविश्वास से कोसो दूर यह त्योहार सामाजिक समरसता के प्रतीक भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है. ऐसे तो भगवान श्रीकृष्ण के उपासक हर संप्रदाय के लोगों में हैं. लेकिन गोवर्धन पूजा यादव समाज के लोग धूमधाम से करते हैं. कहा जाता है कि अंधविश्वास को सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण ने दूर कर समाज को यह संदेश दिया कि कर्म से बड़ा कुछ भी नहीं है. कर्म करने वाला हीं श्रेष्ठता को प्राप्त करता है. जो जरूरतमंद की सेवा करता है, कमजोरों की मदद करता है, अत्याचार का विरोध कर समाज को बचाता है, वास्तविकता को जानकर कोई निर्णय लेता है, अपना पराया का भेद भाव नहीं करता, गलत को गलत कहता है, उसे लोग भगवान का दर्जा देते हैं, और धर्म भी यही दर्शाता है. डुमरांव प्रखंड के सोवां गांव में देवरहीं श्रीकृष्ण मंदिर में गोवर्धन पर्वत सहित भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना विधि-विधान से किया बुधवार को किया गया. इस दौरान परंपरागत खेल नौजवानों द्वारा साबल भी खेला गया. पूजा के दौरान लोरिकायन बिरहा गाया जाता है जिसमें घटनाओं का जिक्र तक होता है. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान मर्दन कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी. इंद्र स्वयं श्रीकृष्ण से क्षमा याचना किए थे. ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहे थे तभी से गोवर्धन पूजा होते आ रहा है. शिक्षक मुक्तेश्वर प्रसाद ने कहा कि श्रीकृष्ण के मानने वाले जाति-धर्म के बंधन में नहीं बंधते हैं. उनके लिए जो कर्मयोगी होता है और जिसके पास शिक्षा है वही श्रेष्ठ है. मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से श्रेष्ठ होता है. गीता भागवत में भी कर्म की प्रधानता दी गई है. गोवर्धन पूजा सामाजिक समरसता का प्रतीक है इसलिए सभी को मिल जुलकर मनाना चाहिए. पूजा में शामिल सुशील यादव, अवधबिहारी यादव, चंदन कुमार, उधारी यादव, विकास कुमार, बुधन यादव, लालबाबू यादव, सनोज यादव, चंद्रमा यादव, संजय कुमार, गुप्तेश्वर प्रसाद यादव, जज यादव, जोमधारी यादव, योगेंद्र कुमार, महेंद्र प्रसाद यादव, बृजकुमार यादव, साधू जी जनार्दन शर्मा, जितेंद्र कुमार सीताराम यादव, आयुष कुमार, आशीष कुमार सहित आदि भक्त मौजूद थे.
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