निर्माण के छह साल बाद भी 318 वार्डों में बिना बिजली कनेक्शन के चल रहे मोटर
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जिले के 151 वार्डों में लगा नल-जल का स्मार्ट मीटर ही हो गया है गायब
बक्सर.
जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है. वर्ष 2016 में शुरू की गयी इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था और इसे वित्तीय वर्ष 2019-20 तक पूर्ण कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन छह साल बाद भी हालात यह हैं कि कई पंचायतों में योजना जैसे-तैसे चल रही है. विद्युत विभाग के अनुसार अगर कनेक्शन नहीं है तो कैसे चल रहा है और जहां व्यवस्था बनायी भी गयी, वहां रखरखाव और संचालन की स्थिति बेहद खराब है. जिले की विभिन्न पंचायतों के वार्डों में इस योजना के तहत पानी की टंकियां और पाइपलाइन तो बिछा दी गयीं, लेकिन बिजली कनेक्शन के अभाव में कई जगहों पर पानी की आपूर्ति शुरू ही नहीं हो सकी. आंकड़ों के अनुसार लगभग 61 पंचायतों के 318 वार्डों में अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं लिया गया है. ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर बनायी गयी संरचनाएं बेकार साबित हो रही है. दो विभागों में बंटा था काम : इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी शुरू में लोकस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग के बीच बांटी गयी थी. कुछ वार्डों में लोकस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने काम किया. जबकि अन्य वार्डों में पंचायती राज विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गयी. बाद में जुलाई 2023 से अक्टूबर 2023 के बीच इन योजनाओं का हस्तांतरण पंचायती राज विभाग से लोकस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को कर दिया गया, लेकिन इसके बाद स्थिति में सुधार होने के बजाय और अधिक लापरवाही सामने आने लगी. 151 वार्डों में लगाये गये मीटर ही गायब : सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 151 वार्डों में लगाये गये स्मार्ट बिजली मीटर ही गायब हो गये हैं. इन मीटरों की कीमत लगभग आठ हजार रुपये प्रति यूनिट बतायी जा रही है. इस हिसाब से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. हैरानी की बात यह है कि इन मीटरों के गायब होने की जानकारी न तो बिजली विभाग को है और न ही पंचायती राज विभाग या लोकस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को कोई स्पष्ट जानकारी है. बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले को लेकर कई बार पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. विभागीय उदासीनता के कारण न केवल सरकारी धन की हानि हो रही है, बल्कि आम लोगों को भी शुद्ध पेयजल की सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि योजना की शुरुआत के समय काफी उम्मीदें थीं कि घर-घर नल से पानी मिलेगा और पानी की समस्या से छुटकारा मिलेगा, लेकिन बिजली कनेक्शन के अभाव और उपकरणों की चोरी या गुमशुदगी के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. कई जगहों पर टंकियां खड़ी हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं चढ़ता. अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और गायब हुए स्मार्ट मीटरों की भरपाई कैसे होगी. वहीं सवाल यह भी उठता है बिना विद्युत कनेक्शन के 318 टंकी कैसे चल रहे हैं.
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