बक्सर. धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध जिला अपनी पौराणिक धरोहरों के कारण रामायण काल से जुड़ा माना जाता है. यहां स्थित अनेक सरोवर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र रहे हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और भू-जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. इन्हीं में प्रमुख हैं अंजनी सरोवर और उधम सिंह सरोवर.दुर्भाग्यवश, वर्तमान समय में ये दोनों सरोवर अतिक्रमण, उपेक्षा और असामाजिक गतिविधियों के कारण धीरे-धीरे अपना अस्तित्व को खोते जा रहे हैं. अंजनी सरोवर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. सरोवर के चारों ओर अस्थायी अतिक्रमण इस कदर बढ़ चुका है कि उसकी मूल पहचान ही धुंधली पड़ती जा रही है. ठेले, झोपड़ियां और अस्थायी निर्माणों ने सरोवर की परिधि को जकड़ लिया है. इससे भी गंभीर बात यह है कि कुछ लोगों ने सरोवर की भूमि पर स्थायी मकान तक बना लिए हैं. यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जलस्रोत को खत्म करने जैसा है. एक ओर राज्य सरकार जलस्रोतों को बचाने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीच स्थित अंजनी सरोवर पर न जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही किसी जनप्रतिनिधि की सक्रियता दिखाई देती है. मौके पर पड़ताल करने गई प्रभात खबर टीम ने पाया कि सरोवर के चारों तरफ घनी झाड़ियां उग आयी हैं. साफ-सफाई के अभाव में यह स्थान वीरान और असुरक्षित बन गया है. जगह-जगह शराब की खाली बोतलें पड़ी मिलीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां शराबियों का जमावड़ा आम बात हो चुकी है. इससे स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल है. उधर, नंदांव क्षेत्र में स्थित उधम सिंह सरोवर की हालत भी कुछ अलग नहीं है. इस सरोवर को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जो मुख्य गेट लगाया गया था, उसे असामाजिक तत्वों ने चोरी कर लिया. सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अब वहां कुछ भी शेष नहीं बचा है. सरोवर में पानी भरने के लिए जो बोरिंग लगाई गई थी, वह लंबे समय से बंद पड़ी है. हालात ऐसे हैं कि गर्मी तो दूर की बात बरसात के मौसम में भी सरोवर में पानी नहीं रहता. उधम सिंह सरोवर की बाउंड्री वॉल जगह-जगह से टूट चुकी है. कई स्थानों पर दीवार गिर गयी है, जिससे अतिक्रमणकारियों के लिए रास्ता और आसान हो गया है. स्थानीय लोगों द्वारा सरोवर के कुछ हिस्सों में गोबर, कचरा और अन्य सामग्री जमा कर दी गयी है. यह न केवल सरोवर की सुंदरता को नष्ट कर रहा है, बल्कि जल प्रदूषण को भी बढ़ावा दे रहा है. सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि उधम सिंह सरोवर अब शराबी और जुआरियों का अड्डा बनता जा रहा है. दिन ढलते ही यहां जुआ खेलने वालों और शराब पीने वालों का जमावड़ा लग जाता है. इससे सामाजिक माहौल खराब हो रहा है और आसपास रहने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो ये ऐतिहासिक सरोवर पूरी तरह समाप्त हो जायेंगे. कभी जिन सरोवरों के तट पर धार्मिक अनुष्ठान, छठ पूजा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, आज वही स्थल असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं. सरोवरों का संरक्षण केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी आवश्यक है. सरोवर वर्षा जल को संचित कर भू-जल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं. इनके खत्म होने से भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिला प्रशासन और नगर प्रशासन कब जागेगा क्या अंजनी सरोवर और उधम सिंह सरोवर को बचाने के लिए ठोस कार्रवाई होगी या ये भी कागजों में दर्ज अन्य जलस्रोतों की तरह इतिहास बनकर रह जायेंगे. जरूरत है कि अतिक्रमण हटाकर सरोवरों का सौंदर्यीकरण किया जाये, सुरक्षा व्यवस्था बहाल हो और असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाये. तभी इन सरोवरों का अस्तित्व बचाया जा सकता है और बक्सर की धार्मिक-ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखा जा सकेगा. क्या कहते हैं अधिकारी सरोवर पर जो अतिक्रमण है. उसे हटाने के लिए सीओ को निर्देश जारी किया गया है. अतिक्रमणवाद चलाकर सरोवरों को अतिक्रमणमुक्त किया जायेगा. अरुण कुमार सिंह, अपर समार्हता, बक्सर
अंजनी सरोवर व उधम सिंह सरोवर अतिक्रमण की भेंट चढ़ा
धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध जिला अपनी पौराणिक धरोहरों के कारण रामायण काल से जुड़ा माना जाता है.
