buxar news : जिले को मिला अपना वन कार्यालय, अब आरा जाने से मिलेगा छुटकारा

buxar news : एक अप्रैल से जिले में ही बैठेंगे डीएफओ

बक्सर. भोजपुर जिले से कटकर 17 मार्च, 1991 को बक्सर जिला बनाया गया था. लेकिन, जिला वन कार्यालय भोजपुर में ही रह गया था. जिले के वन विभाग से संबंधित कामकाज भोजपुर में ही होता है.

इसके लिए 80 किलोमीटर की दूरी तय कर भोजपुर जाना पड़ता है. जिला वन कार्यालय नहीं होने की वजह से केवल एक रेंजर के भरोसे काम चल रहा है. लेकिन, अब जिला वन कार्यालय होने की वजह से तीन-तीन रेंजर जिले को मिलेंगे. विभागीय जानकारी के अनुसार आरा डिवीजन की स्थापना 1986 में की गयी. उसी समय बक्सर में रेंज ऑफिस बनाया गया है. जिले में पहला रेंजर प्रेम प्रकाश पांडेय का पदस्थापन एक अप्रैल, 1987 को हुआ. तब से लेकर आज तक किराये के भवन में चलाया जा रहा है. उस समय से आज तक पांच से छह स्थान पर बदला गया. जिले को अपना डीएफओ ऑफिस मिलने से 103 नये वन विभाग के पदाधिकारियों को नियुक्त भी किया जायेगा, जिसमें वन प्रमंडल पदाधिकारी एक, सहायक वन संरक्षण एक, वनों के क्षेत्र के पदाधिकारी तीन, वनपाल 12, वनरक्षी 48, सहायक प्रशासी पदाधिकारी एक, प्रधान लिपिक एक, उच्च वर्गीय लिपिक तीन, निम्न वर्गीय लिपिक 11, आशुलिपिक एक, कंप्यूटर ऑपरेटर सात, चालक सात, कार्यालय परिचारी आठ, अमीन एक नियुक्त किये जायेंगे.

अब जिले को मिलेगा पूरा वन प्रमंडल का ढांचा

जिला वन कार्यालय के नये गठन से न केवल बक्सर को अपना डीएफओ मिलेगा, बल्कि जिले को अब एक स्वतंत्र वन प्रमंडल का दर्जा भी मिलेगा. उससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और जिले में पर्यावरणीय गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

103 पद किये गये सृजित

विभागीय योजना के अनुसार नये कार्यालय में कुल 103 पदों पर बहाली की जायेगी, जिनमें वन प्रमंडल पदाधिकारी डीएफओ- 1, सहायक वन संरक्षक-1, वन क्षेत्र पदाधिकारी-3, वनपाल-12, वनरक्षी-48, सहायक प्रशासनिक पदाधिकारी-1, प्रधान लिपिक-1, उच्च वर्गीय लिपिक-3, निम्न वर्गीय लिपिक-11, आशुलिपिक-1, कंप्यूटर ऑपरेटर-7, चालक-7, कार्यालय परिचारी-8, अमीन की नियुक्तियों के बाद बक्सर वन प्रमंडल में कामकाज में तेजी आयेगी और पर्यावरणीय निगरानी में भी सुधार होगा.

जिले में बढ़ेगा पर्यावरणीय कार्यों का दायरा

अब तक जिले में पौधारोपण, वन संपदा प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण जैसे काम भोजपुर कार्यालय के निर्देश में किये जाते थे. समय पर अनुमति या संसाधन न मिलने के कारण कई योजनाएं अधूरी रह जाती थीं. नये जिला कार्यालय के आने से जिले में हर साल हजारों पौधे लगाने की योजना को विस्तार मिलेगी. साथ ही, गंगा किनारे हरित पट्टी विकसित करने और कटाव प्रभावित क्षेत्रों में वन संरक्षण के नये प्रोजेक्ट शुरू होंगे. अब जिले में तीन रेंजर तैनात किये जायेंगे. एक बक्सर सदर, दूसरा डुमरांव और तीसरा चौसा या ब्रह्मपुर इलाके में. इससे निगरानी का दायरा बढ़ेगा और वन अपराधों पर नियंत्रण आसान होगा.

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Published by: Shailesh kumar

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