Buxar News: साधु संतों और श्रद्धालुओं के जय घोष से गूंज उठा क्षेत्र

प्रखंड के केसठ गांव स्थित नवनिर्मित मंदिर में मां काली की प्राण- प्रतिष्ठा व ग्यारह दिवसीय शतचंडी यज्ञ का समापन शुक्रवार को हवन पूजन एवं भव्य भंडारे के साथ संपन्न हो गया

केसठ. प्रखंड के केसठ गांव स्थित नवनिर्मित मंदिर में मां काली की प्राण- प्रतिष्ठा व ग्यारह दिवसीय शतचंडी यज्ञ का समापन शुक्रवार को हवन पूजन एवं भव्य भंडारे के साथ संपन्न हो गया.इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए श्रद्धालुओं व भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मंगल कामना की. प्राण प्रतिष्ठा के लिए यज्ञ के अंतिम दिन हजारों की संख्या में नर-नारी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई थी. भीड़ के चलते मंदिर परिसर में देर शाम तक गहमा-गहमी का माहौल कायम रहा. इस बीच साधु संतों और श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे जयकारे व जयघोष से आस-पास के इलाके में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही थी.वही पुर्व जिला परिषद अध्यक्ष विद्या भारती, मुखिया अरविंद कुमार सिंह उर्फ गामा पहलवान, रवि सिंह, राजू दुबे, संजय उपाध्याय,मोहित दुबे,अनिल उपाध्याय, विकास चौधरी , मुकुंद कुमार, अशोक सिंह, परशुराम जी,रमेश रजक, मुनीब उपाध्याय, मनोज पासवान, विनोद मास्टर,अजय कुमार समेत अन्य लोग शामिल हुए. श्रद्धालुओं और भक्तों ने कथा और प्रवचन को किया श्रवण शतचंडी यज्ञ के समापन को लेकर केसठ गांव का वातावरण पूरी तरह भक्ति की रस में सराबोर था .नवनिर्मित मां काली की प्राण- प्रतिष्ठा पूरी होने के बाद यज्ञाचार्य पंडित दयानंद मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शुक्रवार को पारंपरिक विधि से विशेष पूजा- अर्चना किया. इसके बाद जगदीश्वर संतश्री दीन दयाल दास उर्फ बालक दास जी महाराज के नेतृत्व में ग्यारह दिवसीय महायज्ञ का समापन शास्त्रोक्त विधि से कर दिया गया. इससे पहले श्रद्धालुओं को कथा अमृतपान कराते हुए पंडित दयानंद जी महाराज ने कहा कि सृष्टि परस्पर सहयोग से चलती है. मनुष्य को ऐसे शब्दों का व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिससे किसी प्राणी को कष्ट हो. उन्होंने अच्छे और बुरे कर्मों की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंसा शब्दों के माध्यम से भी होती है.क्योंकि, अभिमान रहित शब्द सनातन की पूंजी है. महायज्ञ को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में पूरे ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा.

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By RAVIRANJAN KUMAR SINGH

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