बक्सर समेत बिहार के सरकारी अस्पतालों में सात निश्चय-3 के तहत रेफरल व्यवस्था बनाने के निर्देश जारी, मरीजों को अब नजदीक ही मिलेगा बेहतर इलाज

बिहार सरकार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ला रही है. सात निश्चय-3 के तहत रेफरल सिस्टम को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है. अब मरीजों को घर के पास ही बेहतर और विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा.

Buxar Health Scheme : बक्सर राज्य सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के रेफरल सिस्टम को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. यह पहल ‘सात निश्चय-3’ के तहत चल रहे सुलभ स्वास्थ्य–सुरक्षित जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत की गई है. इसके तहत जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है.

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि रेफरल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और अनावश्यक रेफरल पर सख्ती से रोक लगाई जाए.

Buxar News : घर के पास ही मिलेगा गुणवत्तापूर्ण इलाज

विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों को बिना आवश्यकता उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर नहीं किया जाएगा. पहले संबंधित अस्पताल में उपलब्ध सभी सुविधाओं का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा. केवल जरूरत पड़ने पर ही मरीजों को रेफर किया जाएगा और उसका कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा.

साथ ही ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी और दुर्घटना से जुड़े सभी मरीजों का 100 प्रतिशत पंजीकरण ‘भव्या पोर्टल’ पर किया जाएगा. मरीजों का आभा आईडी बनाकर उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा.

Health System : 7 दिनों में ICU और 24×7 इमरजेंसी सेवा

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू और 24×7 इमरजेंसी सेवाएं शुरू की जाएं. इसके साथ ही पैथोलॉजी और एक्स-रे जांच की सुविधा भी चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज मिल सके.

अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों, विशेषज्ञों और पारा मेडिकल कर्मियों का भी भव्या पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा. बेड की उपलब्धता, डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर और उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे निगरानी बेहतर हो सके.

Buxar Health Department : रेफर से पहले मरीज को किया जाएगा स्थिर

यदि किसी मरीज को उच्च संस्थान भेजना आवश्यक होगा, तो पहले उसका प्राथमिक उपचार कर उसे स्थिर किया जाएगा. इसके बाद सरकारी एम्बुलेंस से सुरक्षित तरीके से रेफर किया जाएगा. मरीज की पूरी चिकित्सकीय जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर मोबाइल पर भी भेजी जाएगी.

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक संयुक्त रूप से इन निर्देशों के पालन के लिए जिम्मेदार होंगे. लापरवाही या अनावश्यक रेफरल पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.

विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित

यदि जिला अस्पताल में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी होगी, तो सिविल सर्जन अन्य सरकारी अस्पतालों से ऑन-कॉल विशेषज्ञों की सेवा ले सकेंगे. आवश्यकता पड़ने पर प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा.

रेफरल व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की जाएगी. यह समिति हर महीने मामलों की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेगी, जबकि राज्य स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी.

मरीजों को मिलेगा तेज और पारदर्शी इलाज

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन नई व्यवस्थाओं से सरकारी अस्पतालों में संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा. मरीजों को अपने जिले और प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा और बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम होगा. साथ ही डिजिटल हेल्थ सिस्टम से इलाज प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी.

Also Read : Buxar Road Accident: राजपुर में बोलेरो की टक्कर से बाइक सवार दो युवक घायल, चालक फरार


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Mritunjay singh

Published by: Ragini Sharma

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >