Buxar News : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नई बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव स्थल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए. कथा के दौरान भगवान श्रीहरि के वामन अवतार, परम एकादशी व्रती राजा अंबरीष के चरित्र तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर जनकपुर आगमन तक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया.
भगवान भक्तों की रक्षा के लिए लेते हैं अवतार
महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कथा में नेहनिधि नारायण दास भक्तमाली उपाख्य मामाजी के कृपापात्र शिष्य पूज्य श्याम चरण दास जी महाराज ने कहा कि भगवान समय-समय पर धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं. उन्होंने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान ने राजा बलि के अहंकार का अंत कर धर्म की स्थापना की.
राजा अंबरीष के चरित्र से दिया भक्ति का संदेश
कथावाचक ने राजा अंबरीष के प्रसंग के माध्यम से एकादशी व्रत, भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, क्षमा और समर्पण भाव का महत्व बताया. उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में ही भगवान का निवास होता है और श्रद्धा से किया गया भजन जीवन को सफल बनाता है.
श्रीराम की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन
कथा में भगवान श्रीराम के जन्म, बाल लीलाओं, महर्षि विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुर आगमन तक की लीलाओं का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया. श्रद्धालु पूरे समय कथा श्रवण में तल्लीन रहे.
कथा श्रवण से मिलती है आत्मिक शांति
महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत और श्रीरामचरितमानस मानव जीवन को धर्म, सत्य, सेवा, विनम्रता और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाते हैं. श्रद्धा के साथ कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक जागृति और आत्मिक शांति का संचार होता है.
