फसल बोआई करने से पहले बीज उपचार करना जरूरी : बी मौर्या

रवि फसल के बोआई से पहले कृषि विभाग ने जिले के किसानों सलाह दिया कि रबी फसलों में भरपूर उत्पादन प्राप्त करने के लिए आवश्यक है.

बक्सर. रवि फसल के बोआई से पहले कृषि विभाग ने जिले के किसानों सलाह दिया कि रबी फसलों में भरपूर उत्पादन प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि किसान उन्नत एवं प्रतिरोधी किस्मों के स्वच्छ स्वस्थ एवं पुष्ट बीजों की बोआई करें. फसल को प्रारंभ से ही रोग एवं कीटमुक्त रखने के लिए बीज का अनुशंसित बीज शोधक से उपचार अति आवश्यक है. सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण संस्कृति बी मौर्या ने बताया कि बीजोपचार आवश्यक है कि बीजों के अंदर और बाहरी सतह पर बीज जनित रोगाणु एवं कीट मिट्टी में मृदा जनित रोगाणु एवं कीट तथा हवा में वायु जनित रोगाणु एवं कीट सुषुप्त अवस्था में मौजूद रहते हैं. अनुकूल वातावरण मिलने पर ये अंकुरित पौधों में रोग के लक्षण उत्पन्न करते हैं. फफूंद जनित रोग होने पर फफूंदनाशी दवा से बीजोपचार करें. कैसे करें उपचार दलहनी फसलों के उपचार के लिए 250 ग्राम गुड़ को एक लीटर पानी में उबाल कर जब एक तार की चाशनी बन जाएए तब ठंडा कर उसमें राइजोबियम कल्चर मिलाएं. इस मिश्रण को बीज पर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. प्रत्येक दलहनी फसल के लिए अलग-अलग राइजोबियम कल्चर उपलब्ध होता है. एक एकड़ बीज के लिए लगभग 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर की आवश्यकता होती है. उपचार की विधियां : सीड ड्रम विधि- बीज को ड्रम में डालकर अनुशंसित शोधक की मात्रा मिलाएं और हैंडल के सहारे ड्रम को घुमाएं, ताकि बीज पर एक समान परत चढ़ जाए. आवश्यकता अनुसार हल्के पानी के छींटे दिए जा सकते हैं. घड़ा विधि पड़े में बीज और शोधक को आवश्यक अनुपात में डालें दो-तिहाई भरने के बाद घड़े का मुंह बंद कर हिलाएं, ताकि बीज व शोधक अच्छे से मिल जाएं.

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Published by: Amlesh prasad

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