बक्सर. पंचकोसी परिक्रमा के पांचवें दिन गुरुवार को धर्म नगरी बक्सर स्थित विश्वामित्र की तपोभूमि चरित्रवन में लिट्टी-चोखा महाभोज का आयोजन हुआ. जिसमें तकरीबन पांच लाख लोगों ने प्रसाद के रूप में लिट्टी-चोखा का स्वाद चखा. पंचकोसी के इस परंपरागत भोज में शामिल होने के लिए उतर प्रदेश से लेकर झारखंड तथा बिहार के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे थे. इस महाभोज में शामिल होने के लिए एक दिन पूर्व बुधवार से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. बक्सर स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों के रुकते ही प्लेटफार्म पर भीड़ से ठसाठस भर जा रहा था. ट्रेनों से लेकर बसों एवं छोटे-बड़े वाहनों से लोगों के आवागमन का क्रम देर शाम तक जारी रहा. भीड़ के कारण चरित्रवन का चप्पा-चप्पा जाम हो गया था. नतीजा यह था कि गाड़ियों को कौन कहे पैदल चलने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी और भीड़ देर शाम तक छंटने का नाम नहीं ले रही थी. लिट्टी के लिए जर्रे-जर्रे में जल रहीं अंगीठी से निकल रहे धुंआ के कारण पूरा आकाश धुंआ-धुंआ हो गया था. जिसके चलते सांस लेना व आंखें खोलना मुश्किल हो गया था. पंचकोसी के चौथे पड़ाव नुआंव में रात गुजारने के बाद पंचकोसी का जत्था गुरुवार को तड़के चरित्रवन पहुंचा. परिक्रमा कर रहे साधु-संत व श्रद्धालु उतरायणी गंगा में पवित्र डुबकी लगाए. स्नान के बाद श्री लक्ष्मीनारायण भगवान एवं अन्य मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन एवं दान-पुण्य किए. फिर गोबर के उपलों की आंच पर लिट्टी-चोखा पकाकर भगवान को भोग लगाए और प्रसाद के रूप में खुद के साथ सगे-संबंधियों को भी खिलाए. देर शाम सिद्धाश्रम पंचकोसी परिक्रमा समिति के तत्वावधान में चरित्रवन स्थित श्रीनिवास मंदिर परिसर में अध्यक्ष सह बसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में संत सभा का आयोजन हुआ. जिसमें कई पावन धामों के पीठों से पहुंचे धर्माचार्यों द्वारा बक्सर पंचकोसी परिक्रमा के तात्विक व आध्यात्मिक महत्व की विवेचना की गयी.
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