Buxar News : महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय बक्सर के प्रांगण में शनिवार को शैक्षणिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला. महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह की अध्यक्षता और संरक्षण में आयोजित बहुआयामी कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण सत्रों में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में इतिहास, गांधीवादी दर्शन, प्रेमचंद साहित्य और काव्य के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विमर्श हुआ.
गांधीवादी विचारों पर हुआ विभागीय सेमिनार
कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से एक दिवसीय विभागीय सेमिनार आयोजित किया गया. इसका विषय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की समकालीन प्रासंगिकता पर आधारित था.
प्रतियोगितात्मक आधार पर आयोजित इस सत्र में महाविद्यालय के 36 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और गांधीवादी मूल्यों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए. कार्यक्रम में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह, मुख्य अतिथि प्रो. मृत्युंजय सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने विचार रखे.
विद्यार्थियों की चिंतन क्षमता की हुई सराहना
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह ने विद्यार्थियों की चिंतन क्षमता और प्रस्तुति शैली की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैचारिक विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया.
प्रेमचंद दिवस पर साहित्य और समाज पर मंथन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर प्रेमचंद दिवस का आयोजन किया गया. इस दौरान वक्ताओं ने प्रेमचंद के कालजयी साहित्य, सामाजिक सरोकारों और शोषित-वंचित वर्ग के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर विस्तार से चर्चा की.
वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद के होरी, हामिद, जालपा और घिसू जैसे पात्र केवल साहित्यिक कल्पना नहीं हैं, बल्कि वे समाज के वास्तविक स्वरूप को दर्शाते हैं.
मुख्य अतिथि प्रो. मृत्युंजय सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष स्नातकोत्तर हिंदी विभाग तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज कुमार चौधरी, सहायक प्राध्यापक राजकीय डिग्री महाविद्यालय ब्रह्मपुर ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला.
कवि सम्मेलन में साहित्य प्रेमियों ने उठाया आनंद
कार्यक्रम के तीसरे चरण में मां निर्मला देवी फाउंडेशन के सौजन्य से राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर किया और कार्यक्रम को यादगार बना दिया.
इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे. कार्यक्रम ने शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया.
