Buxar News: हाथीपांव के 11 मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का हुआ वितरण, दिया गया प्रशिक्षण

फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के डुमरांव प्रखंड अंतर्गत कोरानसराय पंचायत भवन में शनिवार को शिविर का आयोजन किया गया

बक्सर

. फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के डुमरांव प्रखंड अंतर्गत कोरानसराय पंचायत भवन में शनिवार को शिविर का आयोजन किया गया. शिविर की अध्यक्षता स्थानीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) प्रियंका कुमारी ने की.

इस दौरान फाइलेरिया के हाथीपांव के 11 मरीजों के बीच मोरबिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन (एमएमडीपी) किट का वितरण करते हुए उन्हें इसके इस्तेमाल की विस्तृत जानकारी दी गई. साथ ही, उन्हें 12 दिनों की फाइलेरिया रोधी दवाओं के साथ उचित परामर्श भी दिया गया. शिविर के उद्घाटन के दौरान डुमरांव प्रखंड के वेक्टर जनित रोग पर्यवेक्षक (वीबीडीएस) अभिषेक सिन्हा ने बताया कि फाइलेरिया से प्रभावित अंगों की साफ-सफाई के साथ नियमित देखभाल भी जरूरी है. ताकि, फाइलेरिया के प्रभाव को कम किया जा सके. उन्होंने बताया कि जिन मरीजों के हाथ-पैर में सूजन आ जाती है या फिर उनके फाइलेरिया के हाथीपांव बीमारी से ग्रस्त अंगों से पानी का रिसाव होता है, ऐसी स्थिति में उनके प्रभावित अंगों की सफाई बेहद आवश्यक है. इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनके बीच एमएमडीपी किट प्रदान किया जा रहा है. इस किट में एक-एक टब, मग, बाल्टी तौलिया, साबुन, एंटी फंगल क्रीम आदि शामिल हैं. लगातार इसका इस्तेमाल करने से प्रभावित अंगों के सूजन में भी कमी आएगी. लेकिन, मरीजों को साफ सफाई के साथ नियमित व्यायाम करने की जरूरत है. इसके सकारात्मक प्रभाव अनिवार्य रूप से देखने को मिलेंगे. साफ-सफाई रखने से संक्रमण का नहीं रहता खतरा : इस दौरान सीएचओ प्रियंका कुमारी ने बताया कि हाथीपांव के प्रभावित अंगों की साफ-सफाई व देखभाल जरूरी है. फाइलेरिया ग्रस्त अंगों मुख्यतः पैर की साफ-सफाई रखने से संक्रमण का खतरा नहीं रहता. साथ ही, प्रभावित अंगों के सूजन में भी कमी आती है। मरीज यदि इसके प्रति लापरवाही बरतेंगे तब प्रभावित अंगों के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे समस्या बढ़ जाती है. वहीं, संक्रमण को कम करने के लिए मरीजों को 12 दिनों की दवाएं भी दी जाती है. उन्होंने कहा कि एक बार यह बीमारी हो गई तो ठीक नहीं होती है. उचित प्रबंधन से प्रभावित अंगों की देखभाल की जा सकती और जीवन को सरल बनाया जा सकता है. दवा के सेवन से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है. किट के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया से कराया गया अवगत : शिविर में हाथीपांव के मरीजों को एमएमडीपी किट का प्रयोग करने के पूर्व मरीजों को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया. ताकि वे उपचार की विधि समझ सकें. बताया गया कि किट के इस्तेमाल के दौरान सबसे पहले पैर पर पानी डाल लें. उसके बाद हाथ में साबुन लेकर उसे हलके हाथ से रगड़ें और झाग निकालें. इसके बाद हल्के हाथ से पैर में घुटने से लेकर तलुए तक और उंगलियों के बीच अच्छे से साबुन लगायें. जिसके बाद हल्के हाथ से घुटने से पानी डालकर उसे धो लें. धोने के बाद मुलायम तौलिया लेकर हल्के हाथ से पोछ लें. इसके बाद पैर में जहां पर घाव हो वहां पर एंटी फंगल क्रीम लगायें. वहीं, मरीजों को बताया कि हाथीपांव के मरीजों को सोने समय तकिया या गद्दे का इस्तेमाल कर पैर को ऊंचा करके सोना चाहिए. साथ ही, उन्होंने मरीजों व्यायाम करने की भी सलाह दी. जिससे पैरों को आराम मिले. पीएसपी के माध्यम से की जा रही है नये मरीजों की खोज : शिविर में रोगी हितधारक मंच के सदस्य विद्या सागर प्रसाद ने बताया कि पंचायत में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत रोगी हितधारक मंच के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ साथ नए मरीजों की खोज भी की जा रही है. साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के विशेष तिथियों मसलन स्वास्थ्य मेला, निक्षय दिवस समेत अन्य दिवसों पर भी एचडब्ल्यूसी पर लोगों को जागरूक किया जाता है. ताकि, लोगों को फाइलेरिया के साथ साथ अन्य कार्यक्रमों की पूरी जानकारी हो सके. उन्होंने बताया कि रोगी हितधारक मंच में अभी और भी संस्थानों के लोगों को जाेड़ा जायेगा. ताकि, जागरूकता कार्यक्रम को और भी वृहद् बनाया जा सके. मौके पर मुखिया प्रतिनिधि श्रीभगवान सिंह, पीएसपी सदस्य पार्वती देवी, आशा फैसिलिटेटर उर्मिला देवी, आशा कार्यकर्ताओं में सुजाता देवी, परम शीला देवी, नयनतारा देवी, पूनम देवी, चंदा देवी, राजकुमारी, बबीता देवी समेत फाइलेरिया मरीजों के साथ साथ स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे.

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