Buxar News: हरिकिशुनपुर मध्य विद्यालय के एचएम पाये गये दोषी

सदर प्रखंड स्थित हरिकिशुनपुर मध्य विद्यालय में पिछले 30 मई को एमडीएम में छिपकली पायी गई थी

बक्सर

. सदर प्रखंड स्थित हरिकिशुनपुर मध्य विद्यालय में पिछले 30 मई को एमडीएम में छिपकली पायी गई थी. जिसके बाद एहतियात के तौर पर बच्चों को सदर अस्पताल व नीजी अस्पताल में चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया. जहां लगभग सभी बच्चे स्वस्थ पाये गये थे. जिन्हें बाद में घर भेंज दिया गया. ये वही बच्चे थे जिन्होंने या तो एमडीएम चखा था या चखने वाले थे. हालांकि इस मामले की जांच एक संयुक्त टीम ने की थी. जिसमें प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार को दोषी पाये गये है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एमडीएम) रजनीश उपाध्याय ने जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र पांडेय को रिपोर्ट सौंप दी है. उन्हें प्रभारी प्रधानाध्यापक को निलंबित करने की अनुशंसा की है. जांच रिपोर्ट पर अंतिम फैसला डीईओ को ही करनी है. जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि घटना वाले दिन विद्यालय का निरीक्षण किया गया था. उसमें पाया गया कि स्वयं सेवी संस्था की ओर से मेन्यू के अनुसार लाल चना का छोला तथा जो भोजन दिया गया था, वह रसोई सह भंडार गृह में नहीं रखा गया था. बल्कि ऐसी जगह पर रखा गया था. जहां कीड़े-मकौड़े गिरने संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. प्रपत्र नहीं था तैयार: डीपीओ (एमडीएम) द्धारा भेजे पत्र में इस बात उल्लेख किया गया है कि विभाग की ओर से एक विहित प्रपत्र दिया गया था, जो एमडीएम से संबंधित है. बच्चों को एमडीएम परोसने के उपरांत इस प्रतिवेदन का हर दिन तैयार किया जाना है. इसमें एचएम सहित विद्यालय के सभी शिक्षकों का हस्ताक्षर जरूरी है. परंतु यह नहीं भरा गया था जो लापरवाही को दर्शाता है. विभागीय निर्देश के अनुसार एमडीएम बच्चों को परोसने से पूर्व उसे विद्यालय प्रबंधन से चखना है. जिसमें एमडीएम की गुणवत्ता को परखा जाता है. विद्यालय के शिक्षक संतोष मिश्रा, प्रवीन प्रवाह मसीह तथा रसोईया गुलाबो देवी ने लिखित प्रतिवेदन दिया है कि एमडीएम चखा नहीं गया था. साथ ही प्रभारी एचएम सुनील कुमार ने लिखित रूप से दिया है कि उन्होंने एमडीएम चखा था. जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि जिन बच्चों ने एमडीएम खाया था या आशंका थी कि उन्होंने एक भी निवाला है. उन सभी बच्चों का जांच कराया गया था. परंतु एमडीएम चखने वाले ने अपना न तो जांच कराया था और न हीं इलाज कराया था. इससे स्पष्ट हो रहा है कि प्रभारी एचएम दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे है. इस मामले में प्रभारी एचएम को दोषी पाया गया है. उन पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.

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