Buxar News: रास पंचाध्यायी की कथा का श्रवण कर आनंदित हुए श्रोता

रास पंचाध्यायी श्रीमद भागवत कथा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग है. जब हमारे द्वारा किए गए सत्कर्मों का अभिमान नष्ट हो जाता है तब रास होता है

चौसा

. रास पंचाध्यायी श्रीमद भागवत कथा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग है. जब हमारे द्वारा किए गए सत्कर्मों का अभिमान नष्ट हो जाता है तब रास होता है. रास का अर्थ है पूर्ण समर्पण साधन तत्व का अभिमान छोड़कर जब हम आत्म तत्व से ईश्वर से जुड़ जाते है तभी रास होता है. उक्त बातें रामपुर ग्राम में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में चल रही भागवत कथा में वृन्दावन के कथावाचक आचार्य गोविन्द कृष्ण ने कही. उन्होंने कहा कि जगत के जितने भी भौतिक संसाधन है यह केवल हमारी व्यवस्था है, सुख नहीं है. क्योंकि धन से हम बंगला बना सकते हैं विचार नहीं, धन से हम गद्दा ला सकते हैं नींद नहीं. आज इस भौतिकता के पीछे हम अंधे होकर भाग रहे हैं. याद रखिए अगर अच्छे विचार हैं तो झोपड़ी में भी सुख है और अच्छे विचार नहीं हैं तो महलों में भी शांति नहीं है. सद्विचार ही रास हैं. उद्धव चरित्र के माध्यम से शुकदेव महाराज कहते हैं. ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति तीनों तभी अच्छे लगते हैं जब इनके साथ-साथ सबसे प्रति प्रेमभाव हो, प्रेम संकीर्ण नहीं विस्तृत होना चाहिए. कंस वध एवं महाराज उग्रसेन के पुन: मथुरा का राजा बनना एवं श्रीकृष्ण बलराम सांदीपनी आश्रम उज्जैन विद्या अध्ययन के लिए जाना आदि प्रसंग वर्णन किया गया. कल भागवत समापन में सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया जाएगा. कथा में भगवान की लीलाओं की आकर्षक झांकी सजाकर 56 भोग लगाया गया.

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