Stadium in Poor Condition : राजपुर प्रखंड के खीरी गांव में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत बना स्टेडियम सह खेल मैदान अब सवालों के घेरे में आ गया है. करोड़ों की लागत से तैयार इस खेल मैदान की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसका मुख्य गेट तक टूटकर गिर गया है. स्थिति यह है कि जिस मैदान में खिलाड़ियों को अभ्यास करना था, वहां आज तक कोई खेल गतिविधि शुरू ही नहीं हो पाई है.
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू से ही लापरवाही और अनियमितता का शिकार रहा. अब हालात ऐसे हैं कि मैदान के अंदर जाने पर जगह-जगह दीवारों में दरार साफ दिखाई देती है. वहीं स्टेडियम परिसर में लगी कई स्ट्रीट लाइटें भी खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है.
Buxar News : घटिया निर्माण का आरोप, मानकों की अनदेखी
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर संवेदक पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और सरकारी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई. यही वजह है कि निर्माण के कुछ ही समय बाद स्टेडियम की हालत खराब होने लगी.
ग्रामीणों के अनुसार मैदान तैयार करने के लिए बाहर से मिट्टी लाने के बजाय वहीं जेसीबी से खुदाई कर कंकरीली और पथरीली मिट्टी फैला दी गई. इससे मैदान खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह अनुपयोगी बन गया है. ऐसे मैदान में खेलना जोखिम भरा साबित हो सकता है.
जलजमाव बना बड़ी समस्या
स्टेडियम निर्माण में एक और बड़ी खामी सामने आई है. इसे मुख्य सड़क से करीब 3 फीट नीचे बना दिया गया है. इसके कारण हल्की बारिश में भी वहां पानी भर जाता है. जलजमाव की वजह से न सिर्फ खेल गतिविधियां प्रभावित होती हैं, बल्कि चाहरदीवारी के गिरने का खतरा भी बना रहता है.
चारदीवारी की मजबूती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. नियम के मुताबिक ढलाई में 4 छड़ों और रिंग का इस्तेमाल होना चाहिए था, लेकिन यहां सिर्फ 2 छड़ डालकर काम पूरा कर दिया गया. इतना ही नहीं, ढलाई के बाद पानी की तराई भी ठीक से नहीं की गई, जिसके कारण दीवारों में समय से पहले दरारें पड़ गई हैं.
सोलर लाइट और शौचालय भी बने समस्या
स्टेडियम में लगाई गई सोलर लाइटें भी खराब गुणवत्ता की बताई जा रही हैं. कई लाइटें काम ही नहीं कर रही हैं और जो जल रही हैं, वे पर्याप्त रोशनी नहीं दे पा रही हैं. वहीं शौचालय निर्माण में भी घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे उसकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है.
एक महीने बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को लेकर एक माह पहले प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में आयोजित सहयोग शिविर में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है.
इस मुद्दे को लेकर गांव के समाजसेवी और ग्रामीण जैसे वीरेंद्र गुप्ता, अशोक कुमार सेठ, रामेश्वर यादव, मो जुल्फिकार अली, वदेना देवी, अशरफ राम, मुरलीधर त्रिगुण, फिरोज खलीफा, सुशील देवी, बिन्दु देवी, रेखा देवी, अंजुम बेगम और माया देवी समेत कई लोगों ने आवाज उठाई है.
