Buxar News: इटाढ़ी रोड रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) में दरार आने के बाद बंद पड़ी इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को रेल प्रशासन ने आखिरकार आम जनता के लिए फिर से खोल दिया है. गुरुवार, 11 सितंबर से इस फाटक पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही विधिवत शुरू कर दी गई है. रेलवे ने इस क्रॉसिंग को फिलहाल 6 महीने के लिए अस्थायी रूप से चालू किया है, जिससे पिछले तीन महीनों से आवागमन की भारी समस्या झेल रहे हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है.
उद्घाटन के 4 दिन बाद ही आरओबी में आ गई थी दरार
इटाढ़ी रोड आरओबी का उद्घाटन 2 जून 2026 को बड़ी उम्मीदों के साथ किया गया था, जिसके तुरंत बाद रेलवे ने पुराने समपार फाटक को स्थायी तौर पर बंद कर दिया था. हालांकि, उद्घाटन के महज चार दिन बाद (5 जून) ही आरओबी के पिलर नंबर-5 के समीप ऊपरी सतह धंस गई और सड़क पर गंभीर दरारें उभर आईं. सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन को आनन-फानन में नए पुल पर आवागमन रोकना पड़ा. आरओबी और रेलवे फाटक दोनों एक साथ बंद हो जाने से स्थानीय लोगों का संपर्क मुख्य शहर से पूरी तरह कट गया था.
10 कदम की दूरी के लिए 8 किलोमीटर का चक्कर
फाटक और पुल दोनों बंद होने से स्कूली छात्र-छात्राओं, किसानों, मरीजों और दैनिक व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए लोगों को 5 से 8 किलोमीटर का लंबा और जोखिम भरा चक्कर काटना पड़ रहा था. जनजीवन अस्त-व्यस्त होने के कारण स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त था.
रेल चक्का जाम और अनवरत धरने के बाद झुका रेल प्रशासन
समस्या के समाधान को लेकर जिले में व्यापक जन-आंदोलन शुरू हो गया था. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में रेल चक्का जाम किया था. इसके साथ ही ‘दलित, अति पिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले सरोज राजभर के नेतृत्व में रेलवे क्रॉसिंग पर अनवरत धरना-प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम चलाए गए. जनता के बढ़ते दबाव और लगातार प्रदर्शनों को देखते हुए रेल प्रशासन ने तकनीकी समीक्षा के बाद फाटक को दोबारा खोलने का निर्णय लिया.
6 महीने तक चालू रहेगा फाटक, इस दौरान पूरा होगा आरओबी का काम
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फाटक को 6 माह के लिए अस्थायी तौर पर चालू रखा गया है. इस समयावधि में क्षतिग्रस्त ओवरब्रिज के पिलर और धंसी हुई सड़क की तकनीकी मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा, ताकि पुल को दोबारा सुरक्षित रूप से यातायात के लिए तैयार किया जा सके. स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फाटक खुलने को जन-एकता की जीत बताया है.
