बक्सर
. शहर के आईटीआई मैदान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को वृंदावन के पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि हर नेता धार्मिक और नैतिक मूल्यों से युक्त हो तो भारत निश्चित ही विश्व गुरु बन सकता है. धर्म को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ या रीति-रिवाजों तक सीमित न रखते हुए इसे सत्य, अहिंसा, सेवा, और न्याय पर आधारित एक जीवन पद्धति है.व्यास पीठ से पीएम का किया गुणगान : भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का साधुवाद करते हैं उन्होंने कहा कि जिनके आने के बाद सभी सनातनियों के मन में धर्म के प्रति बोलने का साहस और सामर्थ्य उत्पन्न हुआ है. पीएम का गुणगान करते हुए श्री ठाकुर जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मोदी ने भारतीयता और सनातन मूल्यों को गर्व से प्रस्तुत किया है. उनके कार्यकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का पुनरुत्थान और संरक्षण हुआ, जो भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है. किसी पार्टी अथवा नेता का नाम लेते हुए इशारे-इशारे में उन्होंने कहा कि हमें धर्म और देश के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं के साथ खड़ा होना चाहिए. जो नेता रात के 2:00 बजे तक देश, धर्म, और संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ते हैं, उनके लिए हमें भी 24 घंटे तत्पर रहना चाहिए. गंगा स्नान से होता है जन्म-जन्मांतर का पाप क्षय : महाराज श्री ने कहा कि गंगा के जल में स्नान करने से जन्मों-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है और व्यक्ति को मोक्ष की ओर मार्गदर्शन प्राप्त होता है. आज कतिपय लोग गंगा जी की पवित्रता को भंग कर रहे हैं. वे गंगा जल में पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कूड़ा-कचरा और अन्य गंदगी डाल देते हैं, जिससे यह पावन नदी भी प्रदूषित होती जा रही है. कुछ लोग तो गंगा जी में बर्तन और कपड़े धोते हैं, जिससे न केवल जल अशुद्ध होता है, बल्कि यह धार्मिक अपमान भी है.गंगा को नदी नहीं, मां समझें : श्रद्धालुओं से विनम्र अपील करते हुए महाराज श्री ने कहा की कि गंगा को केवल नदी नहीं, माँ समझें. जिस प्रकार हम अपनी माता के पास गंदगी नहीं फेंकते, उसी प्रकार हमें गंगा माता का भी सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूजा सामग्री प्लास्टिक व कूड़े को गंगा से दूर रखें. गंगा की स्वच्छता हमारी जिम्मेदारी है और यह कार्य भी एक प्रकार का पुण्य और राष्ट्रसेवा है. तन-मन-धन से करनी चाहिए भक्तिहमें तन, मन और धन से भगवान की भक्ति करनी चाहिए. जब हम भगवान की कथा सुनने बैठते हैं, तो वह समय केवल श्रवण का नहीं, आत्मा के उत्थान का होता है. कभी भी कथा को बीच में छोड़कर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वह क्षण स्वयं भगवान का आह्वान होता है. यदि मन में शांति है, तो संसार में भी शांति है. संसार की सभी समस्याओं की जड़ हमारे भीतर की अशांति है. जब मन भगवान में स्थिर होता है, तब संसार की सभी चिंताएं गौण हो जाती हैं.आत्म शुद्धि व मोक्ष का मार्ग है एकादशी व्रत : जिसने 22 एकादशियों का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक कर लिया, उसे यमराज भी छूने का सामर्थ्य नहीं रखते. एकादशी व्रत आत्मशुद्धि और मोक्ष का सीधा मार्ग है. इसलिए हर सनातनी को एकादशी व्रत अवश्य रखना चाहिए. यह केवल शरीर का उपवास नहीं, बल्कि आत्मा का उत्सव है. कथा में सतीश चन्द्र दुबे जी (माननीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार) तथा दिल्ली के सांसद व सिने स्टार मनोज तिवारी ने शामिल होकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया एवं संबोधित किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
