पुष्पवाटिका में प्रभु श्रीराम को देखते ही मां जानकी ने वर के रूप में किया वरण

buxar news : सिय-पिय मिलन महोत्सव. छठे दिन पुष्प वाटिका लीला का हुआ जीवंत मंचन

buxar news : बक्सर. नयी बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम परिसर में बने पंडाल में साकेतवासी संत खाकी बाबा सरकार के 56वें निर्वाण तिथि पर चल रहे सिय-पिय मिलन महोत्सव के छठे दिन रविवार को पुष्प वाटिका लीला साकार हुआ, जिसमें प्रभु श्रीराम व जनक दुलारी सीता का वैदेही वाटिका में पहली बार मिलन हुआ. इसके बाद सीता जी ने मन ही मन उन्हें पति के रूप में वरण कर मां गौरी से मनोकामना पूर्ण होने की कामना की.

लक्ष्मण संग फूल तोड़ने पुष्पवाटिका पहुंचे प्रभु श्रीराम

भव्य पंडाल के बीचों-बीच स्थित मंच पर बने वैदेही वाटिका प्राकृतिक छटा बिखेर रही है. विभिन्न तरह के रंग-बिरंगे फूलों से सजी पुष्प वाटिका मन को लुभा रही है. इधर स्नान व संध्या वंदन के बाद गुरु विश्वामित्र के समक्ष सिर नवाकर उनकी आज्ञा से पूजन के लिए दोनों भाई फूल लेने के लिए रवाना होते हैं और वैदेही वाटिका पहुंचते हैं. वे वाटिका में नये पत्तों, फलों व फूलों से लदे सुंदर वृक्षों की अलौकिक शोभा एवं पक्षियों के कलरव देख मुग्ध हो जाते हैं. इसी बीच वाटिका की रखवाली कर रहे मालियों से श्रीराम व लक्ष्मण की मुलाकात होती है. मालियों से प्रभु श्रीराम पुष्प के लिए वाटिका में प्रवेश की इजाजत मांगते हैं. माली उन्हें अंदर जाने से रोक देते हैं. माली गण दोनों भाइयों के साथ हास-परिहास के बीच उन्हें वहां उलझाए रखते हैं. वे उनसे पदगायन के माध्यम से सवाल करते हैं कि आप तो पुष्प से भी कोमल हैं, सो आपसे फूल तोड़ना संभव नहीं है. काफी जवाब-सवाल के बाद मालियों द्वारा उन्हें प्रवेश हेतु मां जानकी की जयघोष करने की शर्त रखी जाती है. इस पर वे रघुकुल की मर्यादा का हवाला देकर जयघोष से इंकार कर देते हैं. मालियों द्वारा प्रेम का हवाला देकर उन्हें जयकारा लगाने का दोबारा मौका दिया जाता है. फिर मालियों की प्रेम भरी जिद के आगे विवश होकर प्रभु श्रीराम मां सीता की जयकारा लगाते हैं. इसके बाद माली गण हंसी-ठिठोली के बीच उन्हें अंदर जाने की अनुमति देते हैं. प्रधान माली की भूमिका में आश्रम के महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज ने प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण जी को खूब रिझाया और हास-परिहास कर मिथिला के रस्म को पूरा कराया.

सांवले-सलोने श्रीराम को देख सुध-बुध खोयीं सीता की सखियां

माली से अनुमति के पश्चात वाटिका में जाकर दोनों भाई पुष्प तोड़ने लगते हैं, उधर गौरी पूजन के लिए सहेलियों संग मां जानकी का आगमन होता है. इसी क्रम में एक सहेली वाटिका भ्रमण करने निकल जाती हैं. वे पुष्प तोड़ रहे प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को देख अपनी सुध-बुध खो बैठती हैं और दौड़कर सीता जी के पास जाती हैं. वह सखियों संग सीता जी से दोनों भाइयों के सौंदर्य की बखान करती हैं. वे कहती हैं कि किशोर वय के दो अति सुंदर राजकुमार बाग में आये हैं. एक सांवले तो दूसरा गोरे वर्ण का है. उनकी सूरत को बखान करने में मेरी वाणी असमर्थ है. क्योंकि वाणी बिना नेत्र की है और आखें बोलने में सक्षम नहीं है. बावरी सखी की बात सुन एक सयानी सखी कहती है कि महर्षि विश्वामित्र के साथ आये ये वही राजकुमार हैं, जिन्होंने अपने रूप-मोह से जनकपुर के पुरुष व महिलाओं को अपना दीवाना बना लिया है. सभी उनके रूप की बखान करते नहीं थक रहे हैं. यह सुनते ही राजकुमारों को देखने के लिए जानकी के नेत्र अकुला उठते हैं और बावरी सखी को आगे कर सीता जी चल पड़ती हैं. इस बीच सीता जी के हृदय में पवित्र प्रेम उमड़ता है. वे सहमे हुए नजरों से चारों तरफ देखने लगती हैं. इधर कंगन, करधनी व पायजेब की आवाज सुन प्रभु श्रीराम अनुज लक्ष्मण से सीता जी के आगमन से अवगत कराते हैं और मुड़कर ध्वनि की ओर देखते हैं. सीता जी के मुख रूपी चंद्रमा को चकोर की तरह एकटक निहारने लगते हैं. सकुचाते हुए सीता जी भी उन्हें नीचे से ऊपर तक निहारती हैं और पिता के प्रण को याद कर उदास हो जाती हैं.

उद्गार प्रकट कर जानकी ने पकड़े मां गौरी के चरण

सीता जी को देख सखियां व्याकुल हो जाती हैं और देर होने की बात कह सीता जी को साथ लेकर मंदिर में पहुंचती हैं. मंदिर में जनक नंदनी सीता जी विधि-विधान के साथ मां गौरी की पूजन-वंदन करते हुए हाथ जोड़कर कहती हैं कि सभी के हृदय में सदैव निवास करने वाली हे माता गौरी आप मेरे मनोरथ को भलीभांति जानती हैं. यह उद्गार प्रकट कर जानकी जी मां गौरी के चरण पकड़ लेती हैं.

सीता की विनती सुन वश में हुईं मां भवानी

मां गौरी सीता जी के प्रेम भरी विनती को सुन उनके वश में हो जाती है. उनके गले की माला खिसक पड़ती है और प्रतिमा मुस्करा देती है. सीता जी उस माला को प्रसाद रूप में ग्रहण कर धारण करती हैं. माता गौरी, जानकी जी के मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद देती हैं. इसके बाद सीता जी प्रसन्न होकर सखियों संग विदा हो जाती है.

सीता स्वयंवर में श्रीराम ने किया धनुष भंग

पुष्पवाटिका प्रसंग के पश्चात रात में धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया. देश-देशांतर से पहुंचे राजा धनुष तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए नाना प्रकार से जोर आजमाइश कर रहे हैं, लेकिन सभी असफल हो जाते हैं. यह देख महाराज जनक के धैर्य का बांध टूट जाता है. वे अधीर हो जाते हैं और सभा में सभी को धिक्कारते हुए धरती को वीरों से खाली बताते हैं. उनका यह वचन सुन लक्ष्मण जी तमतमा उठते हैं. उनकी भौंहें टेढ़ी हो जाती है. होठ फड़फड़ाने लगते हैं और क्रोध से नेत्र लाल हो जाते हैं. वे कहते हैं कि मैं रघुवीर के सामने अनुशासन के कारण कुछ कर तो नहीं सकता, परंतु प्रभु श्रीराम की कृपा से इस धनुष को गेंद के समान उछाल सकता हूं, घड़े की तरह फोड़ डालूं और सुमेरु पर्वत को मूली की भांति तोड़ सकता हूं, फिर यह पुराने धनुष में क्या रखा है. इस बीच गुरु विश्वामित्र शुभ समय जानकर प्रभु श्रीराम को आदेश देते हैं और प्रभु श्रीराम धनुष को खंडित कर महाराज दशरथ के मनोरथ को पूरा करते हैं. धनुष खंडित होते ही जोर की आवाज होती है और दर्शक जय सियाराम का जयकारा लगाने लगते हैं. धनुष भंग के आवाज को सुन भगवान परशुराम पहुंचते हैं. इसके बाद भगवान परशुराम जी व लक्ष्मण जी के बीच संवाद होता है.

निर्वाण तिथि पर खाकी बाबा को किया गया नमन

साकेतवासी संत खाकी बाबा सरकार की पुण्यतिथि पूजन-अर्चन के साथ मनाई गई. इस अवसर पर विधि-विधान के साथ इस महोत्सव के प्रणेता नेहनिधि श्री नारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य मामाजी के गुरु महर्षि खाकी बाबा की अभिषेक व पूजा की गई. इसके बाद आश्रम परिसर में समष्टि भंडारे का आयोजन किया गया. भंडारे में बड़ी संख्या में संतों एवं भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया. इस क्रम में श्रीधाम वृंदावन के अग्रमलूक पीठाधीश्वर पूज्य श्री राजेन्द्र देवाचार्य जी महाराज ने महर्षि खाकी बाबा को महान संत बताते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया तथा नमन किया. महर्षि खाकी बाबा की पुण्य स्मृति में होने वाले इस महोत्सव का गवाह बनने के लिए देश के कोने-कोने से विभिन्न पीठों के धर्माचार्य एवं पूज्य संत मामाजी के शिष्य पहुंचे थे.

आज निकलेगी श्रीराम की बारात

नयी बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम परिसर से सोमवार को श्रीराम बारात की शोभा यात्रा निकाली जायेगी. शोभायात्रा की तैयारियां रविवार को पूरी कर ली गयी. इसकी जानकारी देते हुए आश्रम के महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज ने बताया कि पूर्वाह्न 9 बजे से हल्दी व मटकोड़ विधि की रस्म पूरी की जायेगी. इसके बाद दोपहर में गाजे-बाजे के बीच श्रीराम समेत चारों भाइयों की बारात निकलेगी. बारात की शोभा यात्रा आश्रम परिसर से निकलकर शहर भ्रमण करेगी और रात को आयोजन स्थल पर लौट जायेगी. मिथिला की रस्म के बीच श्रीराम व जानकी का विवाह 25 नवंबर को संपन्न किया जायेगा.

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Published by: Shailesh kumar

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