बक्सर कोर्ट .
प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में पति, सास और ससुर को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. न्यायालय ने अभियुक्तों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है जिसे नहीं देने पर अतिरिक्त समय जेल में बिताने होंगे. इस आशय की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक आदित्य कुमार वर्मा ने बताया कि अभियोजन कार्यालय द्वारा उक्त मुकदमे को स्पीडी ट्रायल के लिए चिह्नित किया गया था. बताते चलें की रोहतास जिले के नोखा थाना के शेखपुरवा गांव के रामेश्वर चौधरी ने अपनी पुत्री इंदु कुमारी का विवाह 11 जून 2023 को राजपुर थाना के अकबरपुर का रहने वाला दीपक कुमार के साथ किया था. शादी के दूसरे दिन दुल्हन की विदाई की गयी लेकिन ससुराल पहुंचते ही ससुराल पक्ष के लोग उसे मोटरसाइकिल मांगने के लिए दबाव देने लगे तथा उसे फोन से मायके से वाहन के लिए दबाव बनाने को कहा लेकिन उसके पिता ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है कुछ महीने बाद पैसा हो जायेगा तो उसे तो मोटरसाइकिल पहुंचा देगा. इस बीच शादी के लगभग 23 दिनों के बाद ही 4 जुलाई 2023 को इंदु ने अपने पिता को फोन करके कहा कि ये लोग मोटरसाइकिल के लिए मुझे बहुत मार रहे हैं तथा मेरी हत्या कर देंगे . ठीक दूसरे दिन 5 जुलाई को सूचक को यह जानकारी मिली कि उसकी बेटी की हत्या कर दी गयी है. जब वह ससुराल पहुंचा तो गांव के लोगों ने बताया कि सभी लोग घर छोड़कर फरार हो गये हैं. घटना को लेकर राजपुर थाना में कांड संख्या 266 /2023 दर्ज करायी गयी. पुलिस ने मामले को बारीकी से जांच करना शुरू किया था लेकिन लापता इंदु के रहस्य से पर्दा नहीं उठ रहा था, इस बीच जांच के क्रम में इंदु के चचेरे देवर मंटू कुमार पर पुलिस ने दबाव बनाया तो उसने बताया कि इंदु के पति, सास ससुर ने गला दबाकर हत्या कर दी है तथा लाश को कैमूर जिले के सातोंएवती गांव में नहर के पास मिट्टी खोदकर दफना दिया है.पुलिस ने जब मिट्टी खोदकर लाश को बाहर निकाला तो पाया कि अभियुक्तों ने नृशंस तरीके से उसकी हत्या की है . सुनवाई के दौरान न्यायालय में कुल 7 गवाहों की गवाही को प्रस्तुत किया गया जहां उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह ने मृतका के पति दीपक कुमार, ससुर जोशू चौहान तथा सास ललिता देवी को भारतीय दंड विधान की धारा 304 बी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनायी. सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से आदित्य कुमार वर्मा, पीपी नंद गोपाल प्रसाद एवं आनंद मोहन उपाध्याय ने बहस में हिस्सा लिया.
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