डुमरांव
. इलाके के विभिन्न के महिलाओं ने शनिवार की देर रात कलश स्थापना कर मां शीतला की पूजा-अर्चना की. जहां पूरी रात महिलाओं के द्वारा गाए जा रहे परांपरिक देवी गीत निमिया के डाढ़ मईया.. से पूरा इलाका गुंजायमान हो रहा था. पूरी रात महिलाओं ने अपने घरों में देर रात प्रसाद तैयार करने व मां शीतला की पूजा अर्चना में लगी रही. वही अहले सुबह रविवार को डगर दिये जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के देवी मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं की भींड़ पूजा अर्चना के लिए लगी हुई थी. लोगों ने बताया कि घर पर माता शीतला के पूजन कर अपने नजदीक के देवी मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की जाती है. उसके बाद घर वापस आने के बाद श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते है. इसके बारे में पंडित कमलेश पाठक ने बताया कि ऐसा कहा जाता है कि ऋतु परिवर्तन के समय शीतला माता का व्रत और पूजन करने का विधान है. शीतला मां के पूजन करने से समस्त रोग तथा ऋतु परिवर्तन के कारण होने वाले रोग नहीं होते. तथा इस पूजा को करने से माता शीतला देवी खुश होती हैं. इनके पूजन के लिए कलश स्थापना कर प्रसाद के रूप में दाल की पूड़ी और खीर चढ़ाया जाता है. कमलेश पाठक ने बताया कि शीतला माता शीतलता की देवी कहीं जातीं हैं, इन्हें स्वास्थ्य रक्षक देवी भी कहा जाता हैं, गर्मी के शुरूआत में इनकी पूजा इस लिए होती है कि सभी को शीतलता प्रदान करें, ऐसा कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से सभी प्रकार के की बीमारियों से बचाव करतीं हैं जिन्हें नौनिहाल बालकों की रक्षा करने वाली देवी भी कहा गया हैं, जो हर प्रकार से रोग व्याधियों से बचाती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
