एनडीए के साथ जुड़ा रहा उसका कैडर वोट, महागठबंधन के वोट बैंक में हुई सेंधमारी

विधानसभा चुनाव के परिणाम अब सबके सामने हैं. परिणाम के बाद पार्टी प्रत्याशी के साथ विश्लेषकों ने वोटों की समीक्षा शुरू कर दी है.

ब्रह्मपुर. विधानसभा चुनाव के परिणाम अब सबके सामने हैं. परिणाम के बाद पार्टी प्रत्याशी के साथ विश्लेषकों ने वोटों की समीक्षा शुरू कर दी है. निश्चित रूप बक्सर छोड़ जिले के सभी विधानसभा में लड़ाई काफी नजदीक की रही. महागठबंधन के साथ एनडीए प्रत्याशी भी जीत के लिए कई राउंड में जद्दोजहद करते दिखे. हालांकि अंत में बक्सर के चार में तीन बक्सर, राजपुर व डुमरांव सीट पर एनडीए ने अपना कब्जा जमा लिया और महागठबंधन को केवल शंभूनाथ यादव के रूप में एक सीट से संतोष करना पड़ा. दोनों दलों को प्राप्त मत को देखें तो जनता ने नरेंद्र मोदी व नीतीश कुमार के चेहरे पर विश्वास किया और वोट बरसा दिया, यह वोट महागठबंधन के खेमे में न जाकर अन्य प्रत्याशियों के बीच बंट गया. इस वजह से एनडीए कामयाब हो पायी. एनडीए के साथ शहर से लेकर गांव की जनता साथ दिखी. हर जगह निर्णायक मत पड़े. खासकर सवर्ण, इबीसी, दलित, महादलित व आदिवासियों ने एनडीए के पक्ष में अपना समर्थन दिया. ओबीसी मतदाता में एनडीए ने अच्छी-खासी सेंधमारी कर डाली. जिसकी वजह से एनडीए यहां जीतने में कामयाब दिखी. परंतु महागठबंधन के राजद व कांग्रेस प्रत्याशी को केवल माई समीकरण यानी यादव व मुस्लिम का समर्थन आता दिखा.

इबीसी व महिलाओं ने एनडीए प्रत्याशी को किया जबर्दस्त वोट

एनडीए प्रत्याशी को इबीसी व महिला वोटरों ने जबर्दस्त वोट किया. इबीसी के अलावा ओबीसी चोट में खासकर धानुक कुर्मी व कुशवाहा सहित इबीसी के करीब दो दर्जन जातियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में मतदान किया. जबकि, नीतीश कुमार को लेकर दलित व महादलित श्रेणी की कमोबेश सभी जातियों ने एनडीए उम्मीदवार को ही अपना मत दिया. इसके अलावा महिलाओं का रुझान एनडीए उम्मीदवार की ओर दिखा, कहीं न कही शराबबंदी, व दस हजार रुपए का फैक्ट काम कर गया सीधे मतदाता तक विकास पहुंचा है, उन्होंने केवल प्रधानमंत्री मोदी व सीएम नीतीश का चेहरा देखा और वोट किया इन सभी जातियों का विशेष रूप से जीत में अहम भूमिका रही है, हालांकि, इन जातियों का वोट विपक्षी खेमे के उम्मीदवार मिला. परंतु, यह वोट उस लायक नहीं था, कि महागठबंधन की नैया पार करा सके. ब्रह्मपुर छोड़ सभी विधानसभा में यही स्थिति दिखी.

महागठबंधन को अधिक परेशानी इस वजह से हो गयी कि माई समीकरण खासकर यादव जाति का वोट भी प्रत्याशी विशेष ने खास वजहों से अपने साथ जोड़ लिया. जिसकी वजह से डुमरांव जैसे विधानसभा में महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा. लड़ाई काफी दिलचस्प और अलग किस्म की देखने को मिली. अंतिम दौर तक सस्पेंस बना रहा, यहां मैदान में तीन बड़े धुरंधर के बीच फाइट होती रही.

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Published by: Amlesh prasad

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