रामरेखाघाट पर छठ के बाद नहीं हुई है सफाई, जहां तहां फैला है कचरा
नगर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महता वाले रामरेखाघाट पर सफाई व्यवस्था काफी चरमा गयी है. बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रतिदिन गंदगी के बीच ही स्नान एवं पूजन अर्चन करना पड़ता है.
By AMLESH PRASAD | Updated at :
बक्सर. नगर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महता वाले रामरेखाघाट पर सफाई व्यवस्था काफी चरमा गयी है. बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रतिदिन गंदगी के बीच ही स्नान एवं पूजन अर्चन करना पड़ता है. जिसके कारण लोगों को घाट पर स्नान एवं पूजा अर्चन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह समस्या छठ पूर्व के बाद से ही विशेष रूप से कायम है. छठ पर्व के बाद रामरेखाघाट की सफाई पूरी तरह से प्रभावित है. जिसके कारण कचरा सभी पुराना घाट से लेकर नया घाट तक फैला हुआ है. सफाई नहीं होने से प्लास्टिक एवं अन्य प्रकार का कचरा से पूरा घाट भरा हुआ है. वहीं घाट की सफाई को ले नगर परिषद से भारी भरकम राशि खर्च की जाती है. इसके बावजूद ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता वाले रामरेखाघाट पर गंदगी पसरा हुआ है. विभाग भी सफाई एजेंसी के प्रति नतमस्तक एवं लाचार दिख रहा है.
रामरेखाघाट पर फैला है कचरा, सफाई व्यवस्था चढ़ा भ्रष्टाचार का भेंट
रामरेखाघाट पर प्रतिदिन बाहर से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान एवं पूजन करने के लिए आते है. जिसकी सफाई पर भारी भरकम राशि खर्च की जाती है. इसके बावजूद सफाई के नाम पर केवल कोरम पूरा किया जाता है. नगर परिषद के अधिकारियों की मानें तो प्रतिदिन बेहतर सफाई का दावा किया गया है. जबकि रामरेखाघाट पर सीढ़ियों पर फैला कचरा घाट की हकीकत एवं अधिकारियों के सफाई की दावे का हवा निकाल रहा है. रामरेखाघाट के लगभग सभी घाटों पर काफी मात्रा में कचरा इधर-उधर पूरे घाट पर फैला हुआ है. जो नगर परिषद की सफाई व्यवस्था को मुह चिढ़ा रहा है. आम लोगों में आम धारणा कायम हो गई है कि नगर की सफाई व्यवस्था भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ गया है. अधिकारी के नियमित सफाई कराने की दावा का रामरेखाघाट पर फैली गंदगी की यह तस्वीर शनिवार को लगभग 4 बजे संध्या में ली गई है. जहां छठ के पूर्व ही सफाई हुई थी. घाट पर स्थानीय लोगों ने बताया कि सफाई नहीं हो रही है. शनिवार को दोपहर बाद दो सफाई कर्मी पहुंंचे थे. जो रास्ते की सफाई भर किये है. वहीं बताया कि छठ के बाद एक भी दिन सफाई नहीं कराई गई है.
सफाई का बजट है प्रतिमाह एक करोड़ 16 लाख
घाटों की सफाई पर पूर्व में अतिरिक्त 12 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किया जाता था. लेकिन बाद में इसे संयुक्त रूप से करते हुए नगर की सफाई का मासिक खर्च को बढ़ाते हुए नगर परिषद से इसे 84 लाख से एक करोड 16 लाख रूपये कर दिया है. इसके बावजूद सफाई व्यवस्था पूर्व के अपेक्षा काफी शिथिल हो गया है. नगर की सफाई की व्यवस्था के साथ ही घाटों की सफाई की व्यवस्था के बजट में करीब डेढ़ा की वृद्धि के बाद भी प्रभावित हो गया है. इसमें सीमित एवं एक जगह होने वाली सफाई व्यवस्था भी पिछले एक साल में मुक्कमल नहीं हाे सका है. विभागीय सूत्रों की मानें तो 60 से 70 प्रतिशत सफाई की राशि विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ गया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
सफाई नियमित हो रही है. यदि सफाई नहीं हुई है, तो उसकी तस्वीर साक्षा कीजिए. उसे दिखवा लेंगे. वैसे नियमित सफाई कराई जा रही है.
रवि कुमार सिंह, स्वच्छता अधिकारी, नगर परिषद बक्सर
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