Buxar News : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है. पिछले एक सप्ताह से बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में अब जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है. गंगा का पानी घटने से चौसा-मोहनियां मुख्य सड़क से भी बाढ़ का पानी उतरने लगा है. हालांकि, बाढ़ से खेतों में लगी फसलों को भारी नुकसान हुआ है.
दो दिन तक 2 से 3 फीट पानी में डूबी थी सड़क
चौसा-मोहनियां मुख्य सड़क पर दो दिनों तक करीब 2 से 3 फीट पानी जमा रहने के कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था. अब जलस्तर में कमी आने के बाद सड़क से पानी उतरने लगा है और यातायात फिर से शुरू हो गया है. इससे आसपास के लोगों को आवाजाही में काफी सुविधा मिली है.
Also Read : सासाराम: कोचस में लहेरी पैक्स चुनाव सोमवार को, 1155 मतदाताओं के लिए बने 2 मतदान केंद्र
निचले इलाकों पर प्रशासन की नजर
बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. प्रशासन की टीम लगातार गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है. वहीं, निचले इलाकों में राहत कार्य भी जारी रखा गया है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
Also Read : सासाराम के सरकारी हॉल और ओझा टाउन हॉल की बदलेगी सूरत, एसडीएम ने किया औचक निरीक्षण
छह पंचायतों में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद
बाढ़ के कारण जलीलपुर, सिकरौल, बनारपुर, रामपुर, चौसा और चुन्नी पंचायतों के सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी धान और मक्का की फसल पूरी तरह डूब गयी. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.
फसल क्षति का सर्वे कर मुआवजे की मांग
बाढ़ प्रभावित किसानों ने प्रशासन से खेतों में हुई फसल क्षति का सर्वे कराने और उसके आधार पर उचित मुआवजा देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि बाढ़ के कारण उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित हुई हैं, ऐसे में सरकारी स्तर पर राहत मिलना जरूरी है.
Also Read : सासाराम में शिक्षा सेवकों का चार माह से मानदेय बाधित, कर्मचारी संघ ने प्रशासन से भुगतान की उठायी मांग
