Buxar News : उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में लगातार हो रही तेज बारिश का असर अब गंगा के जलस्तर पर साफ दिखने लगा है. गंगा नदी में तेजी से पानी बढ़ने के कारण चौसा प्रखंड क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. पिछले 24 घंटे में जलस्तर में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. रविवार को चौसा के प्रसिद्ध महादेवा घाट की सभी पक्की सीढ़ियां गंगा के पानी में डूब गयीं. एक दिन पहले तक जहां पानी केवल निचली सीढ़ियों तक पहुंचा था, वहीं अब जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ रहा है.
महादेवा घाट की सीढ़ियां पानी में समायीं
गंगा के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से महादेवा घाट पर पानी का दबाव बढ़ गया है. रविवार को घाट की सभी पक्की सीढ़ियां पानी में डूब गयीं. स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, लेकिन पिछले 24 घंटे में पानी बढ़ने की रफ्तार काफी तेज हो गयी है. नदी का पानी अब घाट के आसपास के हिस्सों में भी फैलने लगा है.
गंगा के साथ कर्मनाशा नदी में भी बढ़ा दबाव
गंगा में उफान के साथ कर्मनाशा नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है. दोनों नदियों में पानी बढ़ने से इनके किनारे बसे गांवों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है. चौसा प्रखंड के चौसा, नरबतपुर, बनारपुर, सिकरौल, रोहिनीभान और तिवाय समेत कई गांव बाढ़ संभावित क्षेत्र में आते हैं. नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो इन गांवों में परेशानी बढ़ सकती है.
फसल और घरों में पानी घुसने की आशंका से ग्रामीण चिंतित
जलस्तर बढ़ने के बाद तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. लोगों को घरों में पानी घुसने के साथ ही खेतों में लगी फसलों के प्रभावित होने की आशंका सता रही है. ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है, लेकिन इस बार पानी बढ़ने की रफ्तार अपेक्षाकृत अधिक है. इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.
प्रशासन ने तटीय इलाकों को किया अलर्ट
गंगा और कर्मनाशा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी है. तटीय इलाकों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिये गये हैं. संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव दल को भी अलर्ट रहने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचायी जा सके.
ऊपरी इलाकों की बारिश पर टिकी स्थिति
अधिकारियों के अनुसार गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी मुख्य रूप से ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश पर निर्भर है. यदि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है. ऐसे में चौसा समेत गंगा और कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा और गंभीर हो सकता है. फिलहाल प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
